उच्च न्यायालय ने जेपीएससी, जेएसएससी के जरिये नियुक्त लोगों की बर्खास्तगी पर रोक की अवधि बढ़ाई
उच्च न्यायालय ने जेपीएससी, जेएसएससी के जरिये नियुक्त लोगों की बर्खास्तगी पर रोक की अवधि बढ़ाई
रांची, 18 सितंबर (भाषा) झारखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को 11वीं और 13वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षाओं के जरिए नियुक्त अभ्यर्थियों की बर्खास्तगी पर लगी रोक की अवधि बढ़ा दी।
न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने जेपीएससी और जेएसएससी (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की सीआईडी जांच की देखरेख और निगरानी के लिए उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश गौतम कुमार चौधरी को भी नियुक्त किया।
अदालत ने कहा कि सीआईडी की विशेष जांच टीम (एसआईटी) द्वारा तलब किये गए और जांच के दौरान उत्पीड़न का दावा करने वाले किसी भी अभ्यर्थी को न्यायमूर्ति चौधरी (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता वाली समिति से संपर्क करने की छूट है।
राज्य सरकार ने 18 अगस्त को जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं को रद्द करने की अधिसूचना जारी की थी, जिससे सरकारी कर्मचारी के तौर पर काम कर रहे कई सफल उम्मीदवारों की नौकरी पर असर पड़ा।
इस अधिसूचना के जरिए 2,700 सरकारी कर्मचारियों को उनकी नौकरी से हटा दिया गया।
उच्च न्यायालय ने कहा कि जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई होगी और कुछ कर्मचारियों को गैर-कानूनी तरीके से सरकारी नौकरी मिली होगी, लेकिन सभी नियुक्तियां अवैध नहीं हो सकतीं और एक ही बार में सभी कर्मचारियों को हटाना सही नहीं है।
राज्य सरकार ने इस मामले में अपना जवाबी हलफनामा दाखिल किया, जिसे पीठ ने शुक्रवार को रिकॉर्ड पर लिया।
मामले की अगली सुनवाई सात अक्टूबर को होगी।
अदालत ने 11वीं और 13वीं जेपीएससी परीक्षाओं के जरिए चुने गए अभ्यर्थियों की नियुक्तियां रद्द करने संबंधी सरकार की अधिसूचना पर 20 अगस्त को रोक लगा दी थी।
उच्च न्यायालय ने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्तियां रद्द करने पर भी रोक लगा दी थी।
इस अंतरिम आदेश के बाद, प्रभावित अभ्यर्थियों को अपने-अपने पदों पर बने रहने की अनुमति दी गई थी।
हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया था कि गलत तरीके से नौकरी हासिल करने वाले अभ्यर्थी को जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा, जिसमें नौकरी से बर्खास्तगी भी शामिल है।
उच्च न्यायालय ने 15 सितंबर को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह 11वीं और 13वीं जेपीएससी परीक्षाओं के जरिए की गई नियुक्तियों को रद्द करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 18 सितंबर तक अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करे।
इसके बाद, सरकार ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय मांगा, लेकिन अदालत ने इसे ठुकरा दिया। उच्च न्यायालय ने कहा कि इस मामले की सुनवाई तेजी से होनी चाहिए, क्योंकि इसका असर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों और सरकारी कर्मचारियों पर पड़ रहा है।
रमेश उरांव नाम के व्यक्ति और अन्य ने नियुक्तियां रद्द कर दिये जाने को चुनौती देते हुए याचिकाएं दायर की थीं।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हुए कई अभ्यर्थियों की नौकरी खतरे में है।
भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जारी जांच के बाद, सरकार ने 18 अगस्त को नियुक्तियां रद्द करने की अधिसूचना जारी की थी।
भाषा सुभाष अविनाश
अविनाश

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