हिमाचल प्रदेश में तीन साल में दुष्कर्म के 1,287 मामले दर्ज हुए, 66 मामलों में हुई दोषसिद्धि: सुक्खू

Ads

हिमाचल प्रदेश में तीन साल में दुष्कर्म के 1,287 मामले दर्ज हुए, 66 मामलों में हुई दोषसिद्धि: सुक्खू

  •  
  • Publish Date - September 1, 2026 / 08:29 PM IST,
    Updated On - September 1, 2026 / 08:29 PM IST

शिमला, एक सितंबर (भाषा) हिमाचल प्रदेश में पिछले तीन वर्ष में दुष्कर्म के 1,287 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 66 मामलों में आरोपियों को दोषी ठहराया गया, जबकि 775 मामले अदालतों में लंबित हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को विधानसभा में यह जानकारी दी।

सुक्खू ने करसोग से भाजपा के विधायक दीप राज के सवाल के लिखित जवाब में बताया कि इस अवधि में राज्य में हत्या के 309 मामले भी दर्ज किए गए, जिनमें से पांच मामलों में आरोपियों को दोषी ठहराया गया और छह मामलों में बरी कर दिया गया। उन्होंने बताया कि 233 मामले अदालत में विचाराधीन हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि 31 जुलाई 2026 तक पिछले तीन वर्ष में हिमाचल प्रदेश में हत्या, चोरी, डकैती और अपहरण से जुड़े कुल 5,773 मामले दर्ज किए गए, जिनमें हत्या के 309, चोरी के 3,481, डकैती के 13 और अपहरण के 1,970 मामले शामिल हैं।

मुख्यमंत्री के लिखित जवाब में यह भी बताया गया कि इस अवधि में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 4,379 मामले दर्ज किए गए, जिनमें दुष्कर्म के 1,287, छेड़छाड़ के 435, उत्पीड़न के 646, महिलाओं की हत्या के 96 और शोषण के 1,915 मामले शामिल हैं।

जवाब के अनुसार, दुष्कर्म के 1,287 मामलों में 66 मामलों में आरोपियों को दोषी ठहराया गया और 219 मामलों में बरी कर दिया गया, जबकि 775 मामले अदालतों में लंबित हैं।

राज्य में हत्या के सबसे अधिक मामले शिमला जिले में दर्ज किए गए, जहां इस अवधि में 50 मामले सामने आए। चोरी के मामलों में भी शिमला सबसे आगे रहा, जहां 455 मामले दर्ज किए गए।

दुष्कर्म के सबसे अधिक 187 मामले मंडी में दर्ज किए गए। इसके बाद शिमला और सिरमौर में 168-168 मामले दर्ज हुए।

इसके अलावा सुक्खू ने कांग्रेस विधायक आर.एस. बाली के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार विभिन्न विभागों, निगमों और बोर्ड में काम कर रहे बहुउद्देशीय कर्मचारियों के लिए एक समान नीति बनाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि 2027 में जनगणना के आंकड़े जारी होने के बाद राज्य सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के उम्मीदवारों के लिए एमबीबीएस की सीट बढ़ाने पर विचार करेगी।

सुक्खू ने कहा कि राज्य के हर विभाग, निगम और बोर्ड ने अपनी-अपनी नीतियों के आधार पर बहुउद्देशीय कर्मचारियों की भर्ती की है।

उन्होंने कहा कि इसके कारण अलग-अलग विभागों में इन कर्मचारियों की सेवा शर्तें और मानदेय अलग-अलग हैं।

सुक्खू ने कहा, ‘‘इसे देखते हुए सरकार बहुउद्देशीय कर्मचारियों के लिए एक समान नीति लागू करने पर सक्रिय रूप से काम कर रही है। इससे इन कर्मचारियों को दिए जाने वाले मानदेय में एकरूपता आएगी।’’

भाषा जोहेब रंजन

रंजन