सांप के काटने से युवक की मौत : सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों को मानवाधिकार आयोग का नोटिस

सांप के काटने से युवक की मौत : सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों को मानवाधिकार आयोग का नोटिस

सांप के काटने से युवक की मौत : सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों को मानवाधिकार आयोग का नोटिस
Modified Date: September 9, 2026 / 11:46 am IST
Published Date: September 9, 2026 11:46 am IST

नई दिल्ली, नौ सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में सांप के काटने के बाद इलाज नहीं हो पाने के कारण एक युवक की मौत के मामले में सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों को नोटिस जारी किया है।

अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। आयोग ने यह कदम एक शिकायत के आधार पर उठाया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि चित्रकूट के जिला अस्पताल में चिकित्सकीय लापरवाही और आपात जीवन रक्षक सुविधाओं की कमी के कारण युवक की मौत हुई।

मामले की एक सितंबर की कार्यवाही के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि सांप के काटने के तुरंत बाद पीड़ित को जिला स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था, लेकिन उसे समय पर आपात चिकित्सा सुविधा नहीं दी गई। उसे एंटी स्नेक वेनम (एएसवी), वेंटिलेटर या आईसीयू जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं और पर्याप्त आपात परिवहन व्यवस्था के बिना प्रयागराज रेफर कर दिया गया, जहां रास्ते में उसकी मौत हो गई।

अधिकारियों के अनुसार, शिकायत में कहा गया है कि जिला अस्पताल में जीवन रक्षक चिकित्सा सामग्री की अनुपलब्धता संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया कि उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के खंडेहा गांव में जहरीले सांप के काटने के बाद युवक की मौत गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही, इलाज में देरी और जिला अस्पताल में आपात जीवन रक्षक सुविधाओं के पूरी तरह अभाव के कारण हुई।

शिकायतकर्ता ने आयोग से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार डॉक्टरों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने, सभी जिला अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम की अनिवार्य उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने का निर्देश देने का अनुरोध किया।

मानवाधिकार आयोग ने शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। आयोग ने कहा कि प्रथम दृष्टया ये आरोप पीड़ित के मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े प्रतीत होते हैं।

आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत मामले का संज्ञान लिया है।

आयोग ने राज्य प्राधिकारियों को उच्च जोखिम वाले ऐसे क्षेत्रों की पहचान करने, सांप काटने की घटनाओं का आंकड़ा जुटाने और आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

कानूनगो ने बाद में ‘पीटीआई वीडियो’ से बातचीत में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे गए नोटिस के बारे में जानकारी दी।

भाषा मनीषा वैभव

वैभव


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