तंजावुर (तमिलनाड), 12 जुलाई (भाषा) द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के वरिष्ठ नेता ए. राजा ने अपने आलोचकों को चुनौती दी कि वे उनके परिवार के पास विदेशों में छिपाकर रखा गया एक भी डॉलर का काला धन ढूंढकर दिखाएं।
उन्होंने कहा कि अगर ये दावे सच साबित होते हैं, तो वह जेल जाने को तैयार हैं।
तमिलनाडु के कई दशकों के राजनीतिक इतिहास को याद करते हुए उन्होंने मौजूदा राजनीतिक विरोधियों और मीडिया द्वारा गढ़े गये विमर्श पर तीखा हमला किया एवं द्रविड़ शासन मॉडल का ज़ोरदार बचाव भी किया।
पूर्व दूरसंचार मंत्री राजा ने कहा, ‘‘मैं चुनौती देता हूं कि कोई भी व्यक्ति मेरे परिवार के नाम पर विदेश में छिपाया गया एक भी डॉलर ढूंढकर दिखा दे। अगर कोई इन मनगढ़ंत आरोपों को सच साबित कर सकता है, तो मैं तुरंत जेल जाने को तैयार हूं।’’
दिल्ली की एक अदालत ने राजा को टूजी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला मामले में बरी कर दिया था।
राजा ने शनिवार रात एक जनसभा को संबोधित करते हुए द्रविड़ आंदोलन के दिग्गज नेताओं -ईवीके रामासामी पेरियार, सीएन अन्नादुरई और एम करुणानिधि- की विरासत का ज़क्र किया।
उन्होंने लोगों को याद दिलाया कि जहां केंद्र के नेता हाल में गांवों में बिजली पहुंचाने का श्रेय लेते हैं, वहीं तमिलनाडु ने तत्कालीन मुख्यमंत्री करुणानिधि के दूरदर्शी नेतृत्व में 1970-71 में ही गांवों में शत-प्रतिशत बिजली पहुंचाने का लक्ष्य हासिल कर लिया था।
हाथ से खींचे जाने वाले रिक्शों को खत्म करने, किसानों के लिए मुफ्त बिजली की शुरुआत करने और तंजावुर डेल्टा में भूमिहीनों को ज़मीन के मालिकाना हक दिलाने तक, राजा ने एक ऐसे राज्य की तस्वीर पेश की, जो संरचनात्मक संवेदना और सामाजिक न्याय पर आधारित था।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने राजनीतिक दृढ़ता के ऐतिहासिक दौर पर प्रकाश डालते हुए ‘आपातकाल’ के काले दिनों को याद किया।
उन्होंने कहा कि जब द्रमुक प्रमुख एम. के. स्टालिन 24 साल के थे, तब आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम (मीसा) के तहत उनके साथ बेरहमी से बर्ताव किया गया था।
राजा ने उन गहरे त्यागों का जिक्र करते हुए बताया कि जब कलैगनार (करुणानिधि) जेल में बंद अपने बेटे से मिलने गए और पूछा कि क्या पुलिस ने उन्हें पीटा है, तो स्टालिन ने अपने पिता को बचाने के लिए अपनी गंभीर चोटों को छिपा लिया और कहा, ‘‘मैं अहम नहीं हूं। भारतीय लोकतंत्र को बचाइए’’।
राजा ने मेकेदातु और कावेरी न्यायाधिकरणों से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देते हुए राज्यों के बीच पानी के जटिल विवादों का भी उल्लेख किया। उन्होंने के. कामराज, एम.जी. रामचंद्रन और करुणानिधि जैसे पुराने नेताओं द्वारा दिखाई गई राजनीतिक गरिमा और आपसी सम्मान को फिर से अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि जब तक तमिलनाडु राज्य का अस्तित्व रहेगा, तब तक आत्म-सम्मान, भाषाई गौरव और सामाजिक न्याय के सिद्धांत ही राज्य का मार्गदर्शन करेंगे।
भाषा राजकुमार नेत्रपाल सुरेश
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