अल्पसंख्यक नेताओं के खिलाफ की गयी कार्रवाई में मेरा हाथ नहीं : डी के शिवकुमार

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अल्पसंख्यक नेताओं के खिलाफ की गयी कार्रवाई में मेरा हाथ नहीं : डी के शिवकुमार

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  • Publish Date - April 17, 2026 / 04:32 PM IST,
    Updated On - April 17, 2026 / 04:32 PM IST

(फाइल फोटो के साथ)

बेंगलुरु, 17 अप्रैल (भाषा) कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शुक्रवार को कहा कि हाल में दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव के दौरान आंतरिक साजिश के आरोप के बाद अल्पसंख्यक समुदाय के जिन कुछ कांग्रेस नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की गयी, उसमें उनकी कोई व्यक्तिगत संलिप्तता नहीं है।

शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि ये निर्णय पार्टी आलाकमान ने उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर लिये।

पार्टी अनुशासन को सर्वोपरि बताते हुए प्रदेश काग्रेस अध्यक्ष शिवकुमार ने इस चिंता को कमतर दिखाने का प्रयास किया कि अल्पसंख्यक नेताओं के खिलाफ कार्रवाई से यह संदेश जा सकता है कि ‘मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है।’

उन्होंने कहा, “इस मामले में मेरी कोई निजी भूमिका नहीं है। जो भी निर्णय लिये जाते हैं, वे पार्टी नेतृत्व द्वारा लिये जाते हैं। पार्टी की अपनी रिपोर्टें होती हैं। विधायकों या विधानपरिषद सदस्यों से संबंधित निर्णय दिल्ली से निर्देश के बिना राज्य स्तर पर नहीं लिये जा सकते।”

उन्होंने पत्रकारों से कहा, “लोग मुझे दोष दे सकते हैं। मुझे इसकी परवाह नहीं है। सभी को पार्टी अनुशासन के अनुसार कार्य करना चाहिए।”

कांग्रेस ने विधानपरिषद सदस्य के अब्दुल जब्बार को प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है और एक अन्य विधानपरिषद सदस्य नसीर अहमद को मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव के पद से हटा दिया है।

यह कार्रवाई मुस्लिम नेताओं के एक समूह द्वारा लगाए गए इस आरोप के बाद की गई है कि पार्टी के कुछ सदस्यों ने दावणगेरे दक्षिण सीट के लिए हुए उपचुनाव में आधिकारिक उम्मीदवार को हराने की साजिश रची थी।

इस कार्रवाई के बाद, ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि आवास मंत्री बी जेड जमीर अहमद खान को भी अगले मंत्रिमंडल फेरबदल के दौरान अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

खबरों के मुताबिक, तीनों नेताओं ने दावणनगेरे दक्षिण उपचुनाव में मुस्लिम उम्मीदवार उतारने की मांग की थी, लेकिन पार्टी ने दिवंगत विधायक शमनूर शिवशंकरप्पा के पोते समर्थ मल्लिकार्जुन को प्रत्याशी बना दिया। कहा जाता है कि इसके बाद उन्होंने (अब्दुल जब्बार, नसीर अहमद और जमीर अहमद खान ने) चुनाव प्रचार में सक्रिय रूप से भाग नहीं लिया था।

भाषा राजकुमार सुरेश

सुरेश