मैं एक नए भारत के निर्माण का हिस्सा बनना चाहता हूं : डॉ. कर्ण सिंह

मैं एक नए भारत के निर्माण का हिस्सा बनना चाहता हूं : डॉ. कर्ण सिंह

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  • Publish Date - January 15, 2026 / 08:13 PM IST,
    Updated On - January 15, 2026 / 08:13 PM IST

जयपुर, 15 जनवरी (भाषा) वैश्विक साहित्यिक आयोजन जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) में डॉ. कर्ण सिंह की जीवनी पर लिखी पुस्तक ‘ए स्टेट्समैन एंड ए सीकर: द लाइफ एंड लिगेसी ऑफ डॉ. कर्ण सिंह’ के प्रथम संस्करण का बृहस्पतिवार को दरबार हॉल में लोकार्पण हुआ।

इस पुस्तक को लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार हरबंस सिंह ने लिखा है। पुस्तक का विमोचन जेएलएफ की सह निदेशक नमिता गोखले, संजॉय.के.रॉय ने किया। पाठकों के लिए यह पुस्तक 10 फरवरी से उपलब्ध होगी।

पुस्तक के विमोचन के बाद प्रकाशक रवि सिंह ने डॉ. कर्ण सिंह और लेखक हरबंस सिंह से बातचीत की। राजनेता रहे डॉ. कर्ण सिंह ने सत्र की शुरुआत में उस कठिन निर्णय के बारे में बताया, जो उन्हें उस राजतंत्रीय व्यवस्था के संदर्भ में लेना पड़ा, जिसमें वे जन्मे थे।

उन्होंने कहा कि वह एक नए भारत के निर्माण का हिस्सा बनना चाहते थे, जो सामंती व्यवस्था से अलग हो।

पुस्तक के लेखक हरबंस सिंह ने कहा, “मेरे पास यह जीवनी लिखने के अलावा कोई विकल्प नहीं था, मैं जम्मू-कश्मीर और कर्ण सिंह के बारे में पहले से लिखता रहा हूं।”

हरबंस ने बताया कि पुस्तक लिखने से पहले बारीकी से उनके जीवन के बारे में शोध किया गया। इस पुस्तक में डॉ. कर्ण सिंह की जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, शेख अब्दुल्ला, इंदिरा गांधी और जे.आर.डी टाटा जैसी हस्तियों के साथ हुई मुलाकातों का सजीव चित्रण है। साथ ही उनके आध्यात्मिक गुरुओं श्री कृष्णप्रेम और श्री माधव आशीष के प्रभाव को भी रेखांकित गया गया हैं, जिसने उन्हें एक राजनेता के साथ-साथ एक गहरा साधक बनाया।

भाषा

बाकोलिया रवि कांत