राजनीतिक ‘संन्यास’ नहीं लूंगी, भाजपा को हाशिये पर धकेलने तक नहीं रुकूंगी : ममता

राजनीतिक ‘संन्यास’ नहीं लूंगी, भाजपा को हाशिये पर धकेलने तक नहीं रुकूंगी : ममता

राजनीतिक ‘संन्यास’ नहीं लूंगी, भाजपा को हाशिये पर धकेलने तक नहीं रुकूंगी : ममता
Modified Date: August 24, 2026 / 06:00 pm IST
Published Date: August 24, 2026 6:00 pm IST

कोलकाता, 24 अगस्त (भाषा) तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने सोमवार को कहा कि वह राजनीतिक ‘संन्यास’ नहीं लेंगी और तब तक नहीं रुकेंगी जब तक वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हाशिये पर नहीं धकेल देतीं।

बनर्जी ने सोशल मीडिया मंच ‘फेसबुक’ पर यह भी कहा कि राज्य की सत्ता में बदलाव के चार महीने के भीतर ही लोगों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का असली चेहरा देख लिया है। बनर्जी ने आरोप लगाया कि जनगणना की कवायद राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) लागू करने की एक और ‘पिछले दरवाजे से की गई कोशिश’ है और इसे राजनीतिक दलों से सलाह किए बिना लागू किया गया।

उन्होंने लोगों को जनगणना के फॉर्म पर हस्ताक्षर करने और व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से पहले सतर्क रहने को कहा तथा चेतावनी दी कि इससे उनकी निजी बचत तक खत्म हो सकती है।

राज्य के विभिन्न हिस्सों में महिलाओं द्वारा अन्नपूर्णा भंडार वित्तीय सहायता योजना की राशि के वितरण में कथित देरी को लेकर किए जा रहे प्रदर्शनों के बीच बनर्जी ने कहा कि राज्य की भाजपा सरकार अपात्रता का हवाला देकर लाभार्थियों की संख्या घटा रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री बनर्जी ने आरोप लगाया, ‘‘हमने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए लक्ष्मीर भंडार शुरू किया था, लेकिन भाजपा अन्नपूर्णा भंडार का पैसा देने में धर्म और जाति को आधार बना रही है। वह चुनाव से पहले सभी महिलाओं को अन्नपूर्णा योजना का पैसा देने के अपने वादे का उल्लंघन कर रही है और अब उन्हें धोखा दे रही है।’’

यादवपुर विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और वामपंथी छात्रों के बीच झड़पों के बीच उन्होंने भाजपा पर परिसर में तोड़फोड़ करवाने का आरोप लगाया और कहा, ‘‘वहां कुछ छात्रों के साथ हमारे मतभेद होने के बावजूद हम उनका सम्मान करते हैं।’’

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उन्होंने आरोप लगाया कि इस कवायद के जरिए लाखों वास्तविक मतदाताओं के नाम अवैध रूप से हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वह उनके नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए फिर से उच्चतम न्यायालय का रुख करेंगी।

भाषा अमित दिलीप

दिलीप


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