पति-पत्नी के बीच मुद्दे ना सुलझें तो जीवनसाथी बन जाता है जी का जंजाल: अदालत

पति-पत्नी के बीच मुद्दे ना सुलझें तो जीवनसाथी बन जाता है जी का जंजाल: अदालत

पति-पत्नी के बीच मुद्दे ना सुलझें तो जीवनसाथी बन जाता है जी का जंजाल: अदालत
Modified Date: August 25, 2026 / 05:03 pm IST
Published Date: August 25, 2026 5:03 pm IST

नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि विवाह संस्था काफी विरोधाभासी है और यदि पति-पत्नी के बीच के मुद्दों का जल्द समाधान नहीं किया जाए तो ‘जीवनसाथी’ ही ‘जी का जंजाल’ बन जाता है।

उच्च न्यायालय ने कहा कि पति-पत्नी का संबंध मनुष्यों के सबसे खूबसूरत रिश्तों में से एक है लेकिन वैवाहिक संबंधों में चीजें बिगड़ने पर यही रिश्ता सबसे भयावह हो जाता है।

न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव ने ये टिप्पणियां एक व्यक्ति की अपील मंजूर करते हुए कीं। निचली अदालत ने उसे पत्नी के मुंह में बेगॉन स्प्रे डालकर उसकी हत्या की कोशिश करने के मामले में तीन साल कैद की सजा सुनाई थी।

उच्च न्यायालय ने मामले में नफे सिंह को बरी करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 के तहत अपेक्षित इरादे और जानकारी के संबंध में ठोस साक्ष्य पेश करने में विफल रहा।

अदालत ने व्यक्ति को संदेह का लाभ देते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर पेश किए गए इस तरह के कमजोर साक्ष्य के आधार पर कार्रवाई करना बेहद असुरक्षित होगा।

उच्च न्यायालय ने 24 अगस्त के अपने फैसले में कहा, ‘‘विवाह संस्था काफी विरोधाभासी और चरम स्थितियों से भरी हुई है। सावधानी से नहीं संभालने पर जो सबसे अच्छा है, वह कुछ ही समय में सबसे खराब हो जाता है। यदि मुद्दों पर जल्द ध्यान नहीं दिया जाए और उनका समाधान नहीं किया जाए तो बेहतर जीवनसाथी ही कटु जीवनसाथी बन जाता है।’’

अदालत ने आगे कहा, ‘‘मनुष्यों के सबसे खूबसूरत रिश्तों में से एक पति-पत्नी का रिश्ता है, लेकिन वैवाहिक संबंधों में चीजें गलत होने पर यही रिश्ता सबसे भयावह हो जाता है। समय निश्चित रूप से बड़ा उपचारक है और जीवन के कई दर्द को कम कर देता है, लेकिन रिश्तों में देरी करना उल्टा असर भी डाल सकता है।’’

उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि रिश्तों को सावधानी और समय रहते नहीं संभाला जाए तो वे पूरी तरह अलग, अवांछित और अप्रत्याशित दिशा में जा सकते हैं।

अदालत ने कहा कि विवाह संस्था विश्वास, साथ और एक-दूसरे के प्रति दोनों पक्षों के भरोसे से मजबूत होती है। जब दोनों पक्ष एक-दूसरे के साथ सुरक्षित और आश्वस्त महसूस करते हैं, तब यह रिश्ता मजबूत बना रहता है।

अदालत ने कहा, ‘‘पति-पत्नी के बीच इस बंधन में आने वाली परेशानियां न केवल विवाह संस्था को प्रभावित करती हैं, बल्कि परिवार और अंततः समाज को भी प्रभावित करती हैं। विश्वास और भरोसे पर आधारित रिश्ता संघर्ष के क्षेत्र में बदल जाता है, जहां अक्सर शारीरिक हिंसा भी जगह बना लेती है।’’

अदालत ने कहा कि हाल के वर्षों में ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जहां पति-पत्नी ने एक-दूसरे के खिलाफ हिंसा की ऐसी चरम स्थितियों का सहारा लिया है, जिनकी कुछ दशक पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।

सिंह और पीड़ित महिला ने 2000 में शादी की थी, लेकिन एक साल के भीतर ही उनके संबंध खराब हो गए। अभियोजन के अनुसार, 2001 में वैवाहिक विवाद के दौरान पति ने पहले अपनी पत्नी को गिलास में बेगॉन कीटनाशक पीने के लिए मजबूर करने की कथित कोशिश की और जब वह सफल नहीं हुआ तो उसने डिब्बे से सीधे उसके गले में कीटनाशक डाल दिया।

इस मामले में व्यक्ति और उसकी मां के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। निचली अदालत ने उसकी मां को बरी कर दिया, जबकि सिंह को हत्या के प्रयास का दोषी ठहराया था।

व्यक्ति ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों से इनकार किया और कहा कि उसकी पत्नी अलग मकान में उसके साथ रहना चाहती थी तथा उसकी विधवा मां को साथ नहीं रखना चाहती थी जिसको लेकर वैवाहिक विवाद हुआ था।

भाषा अमित नरेश

नरेश


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