नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) कांग्रेस ने हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खरगे के सभा स्थल के ‘शुद्धिकरण’ को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उत्तराखंड इकाई के अध्यक्ष महेंद्र भट्ट द्वारा कथित तौर सही ठहराने को लेकर बृहस्पतिवार को भाजपा पर निशाना साधा और कहा कि यदि राज्यसभा में इस मामले पर जेपी नड्डा की ओर से जताया खेद दिखावा नहीं था तो भट्ट को बर्खास्त किया जाए।
भट्ट ने कथित तौर पर कहा है कि उक्त स्थान पर ऐसे नारे लगाए गए थे जो किसी धार्मिक स्थल के लिए उपयुक्त नहीं थे। उन्होंने विपक्ष की ओर से ‘शुद्धिकरण’ की आलोचना को खारिज करते हुए इसे उचित ठहराया।
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘यह पहले दिन से ही स्पष्ट था कि केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा का राज्यसभा में व्यक्त किया गया खेद महज दिखावा था। अगर नड्डा जी वास्तव में यह कहना चाहते थे कि भाजपा ऐसी किसी भी कार्रवाई का समर्थन नहीं करती, तो फिर भाजपा के उत्तराखंड अध्यक्ष खरगे जी के कार्यक्रम के बाद उनके (भाजपा के) कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए तथाकथित ‘शुद्धिकरण’ का बचाव कैसे कर रहे हैं?’’
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का असली जातिवादी चरित्र बार-बार सामने आ जाता है, चाहे उसके नेता इसे छिपाने की कितनी भी कोशिश क्यों न करें।
वेणुगोपाल का कहना था, ‘‘अगर संसद में नड्डा जी के बयान में रत्ती भर भी सच्चाई है, तो उन्हें महेंद्र भट्ट को पद से बर्खास्त करना चाहिए और खरगे जी का अपमान करने वालों के खिलाफ कड़ी आपराधिक कार्रवाई करनी चाहिए।’’
कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने भट्ट की टिप्पणी का वीडियो साझा करते हुए ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि नड्डा जी ने खरगे जी की रैली के बाद हल्द्वानी में हुए शुद्धिकरण को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। सच्चाई यह है कि आरएसएस-भाजपा की रगों में भेदभाव खून की तरह बहता है।’’
खेड़ा ने कहा, ‘‘21वीं सदी में भी दलितों को ऐसी अमानवीय प्रथाओं का सामना करना पड़ रहा है। यह अपने आप में एक त्रासदी है। लेकिन अगर देश के एक प्रमुख दलित नेता और राज्यसभा में विपक्ष के नेता के साथ ऐसा हो सकता है, तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आम दलितों की रोजमर्रा की हकीकत कितनी बदतर होगी।’’
उन्होंने सवाल किया, ‘‘अब जबकि उसके अपने प्रदेश अध्यक्ष ने खुले तौर पर छुआछूत का बचाव किया है, क्या पार्टी उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी? क्या मोदी उन्हें हटाएंगे? अगर नहीं, तो दलितों की एकता और सम्मान को लेकर मोदी की बड़ी-बड़ी अपीलें महज एक और राजनीतिक दिखावा हैं।’’
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