गुजरात: महिला ने बड़ी बेटी से अपने छह नाबालिग बच्चों की अभिरक्षा मांगी

Ads

गुजरात: महिला ने बड़ी बेटी से अपने छह नाबालिग बच्चों की अभिरक्षा मांगी

  •  
  • Publish Date - August 27, 2026 / 06:59 PM IST,
    Updated On - August 27, 2026 / 06:59 PM IST

अहमदाबाद, 27 अगस्त (भाषा) कच्छ जिले की 38 वर्षीय एक विधवा ने अपने तीन से 14 वर्ष की उम्र के छह बच्चों की अभिरक्षा पाने के लिए गुजरात उच्च न्यायालय का रुख किया है। ये बच्चे उसकी 22 वर्षीय विवाहित बड़ी बेटी के पास रह रहे हैं।

महिला ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर यह भी आरोप लगाया है कि उसके दूसरे पति की मौत के बाद उसकी बेटी ने उसके बैंक खातों पर नियंत्रण हासिल कर लिया और लगभग 15 लाख रुपये का गबन किया।

न्यायमूर्ति संगीता विशेन और न्यायमूर्ति उत्कर्ष टी. देसाई की खंडपीठ ने मंगलवार (25 अगस्त) को याचिका पर सुनवाई करते हुए महिला की बेटी, दामाद, कच्छ के पुलिस अधीक्षक और जिले के नखत्राणा कस्बे के पुलिस निरीक्षक सहित अन्य को नोटिस जारी किए। अदालत ने सभी से आठ सितंबर तक जवाब मांगा है।

बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका एक कानूनी उपाय है, जिसके तहत किसी लापता या कथित तौर पर अवैध रूप से हिरासत में रखे गए व्यक्ति को अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश देने का अनुरोध किया जाता है।

महिला ने कच्छ की एक मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा अपने नाबालिग बच्चों की अभिरक्षा की मांग वाली याचिका खारिज किए जाने के बाद उच्च न्यायालय का रुख किया। महिला की पहली शादी से एक बेटी और दूसरी शादी से दो बेटे तथा चार बेटियां हैं।

याचिका में कहा गया है कि बड़ी बेटी के घर छोड़कर अपने प्रेमी के साथ शादी करने और अलग रहने के बाद मां-बेटी के संबंध खराब हो गए थे। नवंबर 2023 में महिला ने इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसके बाद उसकी बेटी अधिकारियों के समक्ष पेश हुई और उसने कहा कि वह अपनी इच्छा से मायके से गई थी, जिसके बाद उसकी शादी करा दी गई।

याचिका के अनुसार, महिला के दूसरे पति की छह जून 2025 को मृत्यु हो गई थी। इसके बाद बड़ी बेटी ने अपनी मां को अपने परिवार के साथ रहने के लिए बुलाया। महिला यह प्रस्ताव स्वीकार कर अपने छह नाबालिग बच्चों के साथ बेटी के घर चली गई। हालांकि, कुछ ही महीनों में दोनों के बीच संबंध फिर खराब हो गए।

याचिका में महिला ने आरोप लगाया कि इस दौरान उसकी बड़ी बेटी ने उसकी इच्छा और सहमति के बिना उसके बैंक खातों पर नियंत्रण हासिल कर लिया और उनमें जमा करीब 15 लाख रुपये की पूरी राशि निकाल ली तथा उसका कथित रूप से दुरुपयोग किया।

महिला जब अपनी बेटी का घर छोड़कर जा रही थी, तो कथित तौर पर उसे अपने नाबालिग बच्चों को साथ ले जाने की इजाजत नहीं दी गई; इसके बाद, बच्चों की अभिरक्षा पाने के लिए उसने पिछले साल दिसंबर में कच्छ जिले के मुंद्रा शहर की अदालत का दरवाजा खटखटाया।

हालांकि, मुंद्रा की अदालत ने उसकी याचिका खारिज करते हुए कहा कि बच्चों को जबरन अभिरक्षा में नहीं रखा गया है और वे अपनी बड़ी बहन तथा उसके परिवार के साथ स्वेच्छा से रह रहे हैं।

महिला ने उच्च न्यायालय में बच्चों की हिरासत की मांग करते हुए कहा कि वह उनकी प्राकृतिक अभिभावक है और इनमें सबसे छोटा बच्चा महज तीन साल का है।

भाषा

शुभम नरेश

नरेश