‘मैं वापस आऊंगा’ बंटवारे और किशोरावस्था की कोमल यादों का पिटारा है: इम्तियाज

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'मैं वापस आऊंगा' बंटवारे और किशोरावस्था की कोमल यादों का पिटारा है: इम्तियाज

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  • Publish Date - April 6, 2026 / 04:57 PM IST,
    Updated On - April 6, 2026 / 04:57 PM IST

(बेदिका)

नयी दिल्ली, छह अप्रैल (भाषा) मृत्युशय्या पर पड़ी एक बुजुर्ग महिला के जेहन में खौफनाक सन्नाटा है, सारी यादें उसका साथ छोड़ चुकी हैं। लेकिन इस घड़ी में भी उसे केवल एक चीज याद है: उसकी गुड़िया। शायद वो उस गुड़िया को अपने घर में छोड़ आयी थी जो अब पाकिस्तान में है।

एक बूढ़े आदमी को केवल अपनी किशोरावस्था के अधूरे प्यार की याद है। इन छोटी-छोटी कहानियों ने निर्देशक इम्तियाज़ अली को देश के विभाजन पर आधारित फिल्म ‘‘मैं वापस आऊंगा’’ को बुनने में मदद की।

अली ने ‘पीटीआई-भाषा’ को अपनी नयी फिल्म के बारे में बताया, ‘‘अगर मेरे पास विभाजन पर कहने के लिए कुछ अनूठा न होता, तो मैं कभी भी इस विषय पर फिल्म नहीं बनाना चाहता। मैं किसी घटना की रिपोर्टिंग नहीं करना चाहता।’’

फिल्म में उन्होंने अपने ‘‘अमर सिंह चमकीला’’ के अभिनेता दिलजीत दोसांझ, लंबे समय से सहयोगी रहे संगीतकार ए आर रहमान और गीतकार इरशाद कामिल के साथ फिर से काम किया है।

यह 1947 की कहानी है, लेकिन आज के युवाओं के नजरिए से बयां की गई है। अली ने कहा कि इस लिहाज से यह न सिर्फ एक व्यक्ति की, बल्कि एक राष्ट्र की भी कहानी है।

अली ने कहा, ‘‘जब युद्ध में हार या जीत मिलती है, तो क्या शेष रह जाता है? उस व्यक्ति के मन में क्या शेष रहेगा जो 1947 में हुई घटनाओं में कुछ बदलाव किए बिना इस दुनिया को अलविदा नहीं कह सकता?’’

अली ने कहा कि व्यापक स्तर पर देखा जाए तो विस्थापन पूरी दुनिया के लिए इस सदी की सबसे महत्वपूर्ण घटना है। उन्होंने कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप में अब तक की सबसे महत्वपूर्ण घटना विभाजन है।

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन 78 साल बाद, जब बहुत सी बातें याद नहीं रह गई हों, तो जो बात सबसे गहराई से याद रहती है, वह है किशोरावस्था की कोमलता और वो रोमांस जिसमें हम 1947 में जाने पर लौट जाते हैं। इसलिए यह एक ऐसी ही कहानी है।’’

विभाजन की कहानियों में उनकी रुचि शायद सआदत हसन मंटो, इस्मत चुगताई और कुर्रतुलैन हैदर जैसे लेखकों की रचनाओं से शुरू हुई। यह रुचि उनकी फिल्मों ‘‘जब वी मेट’’, ‘‘लव आज कल’’, ‘‘हाईवे’’, ‘‘रॉकस्टार’’ और उनकी आखिरी हिट फिल्म ‘‘अमर सिंह चमकीला’’ के लिए पंजाब, हिमाचल और दिल्ली की व्यापक यात्राओं के दौरान और भी बढ़ी। इसी दौरान, उन्हें विभाजन के समय विस्थापित हुए लोगों से मिलने और उनकी कहानियां सुनने का मौका मिला।

अली ने कहा, ‘‘उनमें से एक कहानी एक बुजुर्ग महिला के बारे में है जो अपनी मृत्युशय्या पर पड़ी है, उसकी याददाश्त चली गई है और जल्द ही दुनिया को अलविदा कहने वाली है। विभाजन को 78 साल बीत चुके है। और वह बस हर किसी से यही पूछती है – क्या तुमने गुड़िया को संदूक में रख दिया है?’’

फिल्मकार को ये व्यक्तिगत किस्से ‘‘बेहद महत्वपूर्ण, मानवीय और मनोरंजक’’ लगे।

फिल्म में अभिनेता वेदांग रैना और शरवरी ने युवा प्रेमी जोड़े की भूमिका निभाई है जबकि नसीरुद्दीन शाह, दोसांझ के दादा की भूमिका में अपने अतीत के प्यार को याद करते हैं।

‘‘मैं वापस आऊंगा’’ में दोसांझ को रहमान का गीत ‘‘क्या कमाल है’’ गाते भी दर्शाया गया है, जिसे वह ‘‘चमकीला’’ में रुपहले परदे पर नहीं उतार सके थे, जो दिवंगत पंजाबी गायक अमर सिंह चमकीला की एक बायोपिक है।

अली ने कहा कि कहानी लिखते समय उनके मन में दोसांझ का ख्याल तुरंत नहीं आया, लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि इस किरदार को निभाने के लिए अभिनेता-गायक (दोसांझ) से बेहतर कोई नहीं हो सकता।

शाह ने ‘‘चमकीला’’ देखने के बाद इस परियोजना से जुड़ने का फैसला किया और उन्हें यह फिल्म काफी पसंद आई।

अली ने कहा, ‘‘नसीरुद्दीन शाह जैसा कोई अभिनेता नहीं है। और मुझे उन्हें एक सिख, पगड़ीधारी सिख की भूमिका में देखने का मौका मिलने से बहुत खुशी हुई, क्योंकि मुझे याद नहीं कि उन्होंने कभी ऐसी भूमिका निभाई हो। इसलिए मैं बहुत उत्साहित था। और वह भी बहुत उत्साहित थे। हमने उनके किरदार को एक ऐसे व्यक्ति के इर्द-गिर्द गढ़ा है जो अतीत को याद करता है।’’

उन्होंने कहा कि फिल्म 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

इसका निर्माण अप्लॉज़ एंटरटेनमेंट के समीर नायर और दीपक सेगल ने विंडो सीट फिल्म्स के मोहित चौधरी और शिबासिस सरकार के साथ मिलकर किया है।

निर्देशक ने कहा, ‘‘…मुझे लगता है कि दर्शक अच्छी फिल्में, मनोरंजक फिल्में देखना चाहते हैं, और उन्होंने कहा कि सिनेमाघरों में दर्शकों को वापस लाने के लिए वह ‘धुरंधर’ और ‘सैयारा’ के बहुत आभारी हैं।’’

भाषा सुभाष नरेश

नरेश