अवैध खनन: उच्चतम न्यायालय ने राजस्थान में वन अधिकारी को कुचलकर मार दिये जाने का संज्ञान लिया
अवैध खनन: उच्चतम न्यायालय ने राजस्थान में वन अधिकारी को कुचलकर मार दिये जाने का संज्ञान लिया
नयी दिल्ली, 23 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने राजस्थान में अवैध खनन को रोकने के प्रयास के दौरान एक वन अधिकारी को डंपर से कथित तौर पर कुचलकर मार दिए जाने की हाल की घटना का संज्ञान लेते हुए बुधवार को कहा कि ऐसे मामलों में अनिवार्य निवारक निरोधक तंत्र होना चाहिए।
‘राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और लुप्तप्राय जलीय वन्यजीवों को खतरा’ शीर्षक वाले एक लंबित स्वतः संज्ञान मामले में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया गया।
मामले का उल्लेख करने वाले वकील ने कहा कि एक और घटना सामने आई है और राजस्थान में एक वन अधिकारी को डंपर से कुचलकर मार दिया गया है।
पीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि छह अक्टूबर तय की।
पीठ ने राजस्थान सरकार की ओर से पेश वकील से कहा, ‘‘जवाब के साथ पूरी तैयारी करके आएं।’’
उच्चतम न्यायालय ने कहा, ‘‘ऐसे मामलों में अनिवार्य निवारक निरोधक तंत्र होना चाहिए।’’
अधिकारियों ने 22 सितंबर को बताया था कि यह घटना सोमवार देर रात छोटी सादड़ी वन क्षेत्र में उस समय हुई थी जब वनकर्मी प्रताप सिंह चूंडावत और एक वन रक्षक अवैध खनन की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे थे।
अधिकारियों के अनुसार सिंह ने मिट्टी ले जा रहे एक डंपर को रोकने का प्रयास किया, तभी चालक ने उन्हें कथित तौर पर टक्कर मार दी और भागने से पहले उनकी मोटरसाइकिल के साथ उन्हें कई मीटर तक घसीटता हुआ ले गया।
अधिकारियों ने बताया था कि घायल वन कर्मी को एक अस्पताल ले जाया गया और बाद में निम्बाहेड़ा के जिला अस्पताल में रेफर कर दिया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) सुरेश चंद्र अग्रवाल ने बताया कि वन क्षेत्र में अवैध खनन की सूचना मिलने के बाद विभाग की टीम कार्रवाई के लिए मौके पर गई थी।
भाषा देवेंद्र रंजन
रंजन

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