अवैध व्यापार से होता है आर्थिक नुकसान, संगठित अपराध को मिलता है बढ़ावा : न्यायमूर्ति सचदेवा

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अवैध व्यापार से होता है आर्थिक नुकसान, संगठित अपराध को मिलता है बढ़ावा : न्यायमूर्ति सचदेवा

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  • Publish Date - September 18, 2026 / 08:25 PM IST,
    Updated On - September 18, 2026 / 08:25 PM IST

नयी दिल्ली, 18 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश संजीव सचदेवा ने नकली सामान बनाने और तस्करी से निपटने के लिए सरकार, प्रवर्तन एजेंसियों, उद्योग और उपभोक्ताओं द्वारा समन्वित प्रयास करने की आवश्यकता पर शुक्रवार को बल दिया।

न्यायमूर्ति सचदेवा ने कहा कि इस तरह के अवैध व्यापार से आर्थिक नुकसान होता है और यह संगठित अपराध एवं आतंकवाद को भी बढ़ावा दे सकता है।

वह फिक्की कास्केड द्वारा ‘‘एक विश्व, एक संघर्ष : सामूहिक कदम के जरिये नकली सामान और तस्करी का खात्मा’’ विषय पर आयोजित ‘तस्करी और नकली व्यापार के खिलाफ आंदोलन’ (मैस्केड)-2026 के 12वें संस्करण को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि नकली और तस्करी के सामान वैध व्यवसायों को नुकसान पहुंचाते हैं, सरकार के कर राजस्व को घटाते हैं और इसके कारण नौकरियां भी जाती हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ये गतिविधियां वैध व्यवसायों को कमजोर करती हैं… अगर कोई ऐसी चीज है, जो अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाती है और कर राजस्व कम करती है, तो वह देश के लिए एक बड़ा झटका साबित होती है; इससे भारी मात्रा में आर्थिक नुकसान होता है। आपकी नौकरियां चली जाती हैं। हमारे यहां की वैध विनिर्माण इकाइयां नौकरियां पैदा करती हैं। यदि आप तस्करी के उत्पादों का उपयोग करते हैं, तो नौकरियां दुनिया में कहीं और पैदा होती हैं। इसके भुक्तभोगी हम बनते हैं।’’

न्यायमूर्ति सचदेवा ने कहा कि यह मुद्दा अब केवल विलासिता के नकली सामानों तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि नकली उत्पादों का जाल अब दवाओं, कृषि उत्पादों, कीटनाशकों और बीजों तक फैल चुका है, जो आर्थिक नुकसान से कहीं आगे का खतरा पैदा कर रहा है।

शीर्ष अदालत के न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं और यह देखना होगा कि अवैध व्यवसाय आगे न बढ़ें। इसका एक और पहलू भी है। तस्करी से भारी मात्रा में ऐसे फंड को बढ़ावा मिलता है, जिसे हवाला के जरिये भेजा जाता है, और फिर उसका उपयोग संगठित अपराध और आतंकवाद को फंड करने के लिए किया जाता है।’’

उन्होंने कहा कि अब यह सिर्फ नकली सामान या तस्करी या किसी उपभोक्ता का नुकसान होने तक सीमित नहीं है; बल्कि यह पूरे देश और पूरी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है।

तकनीक द्वारा पैदा की गई चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म ने जालसाजों के लिए नकली वेबसाइट और उत्पाद सूची बनाना आसान बना दिया है, जबकि छोटी खेपों ने कानून प्रवर्तन को और अधिक कठिन बना दिया है।

न्यायमूर्ति सचदेव ने अदालतों द्वारा ‘‘डायनेमिक इंजंक्शन्स’’ के उपयोग पर भी प्रकाश डाला, जिसके तहत न केवल पहचानी गई नकली वेबसाइट को ब्लॉक किया जाता है, बल्कि उनकी हू-ब-हू नकल और भ्रामक रूप से समान दिखने वाली साइट पर भी रोक लगाई जाती है।

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले दशक में, भारत में गैर-कानूनी व्यापार की कुल कीमत लगभग एक लाख करोड़ रुपये से बढ़कर करीब आठ लाख करोड़ रुपये हो गई है। रोजगार के अवसर विदेश चले जाने की वजह से लगभग 16 लाख नौकरियां चली गई हैं, लेकिन इसे रोकने या पकड़ने की दर सिर्फ़ तीन प्रतिशत रही है।’’

न्यायमूर्ति सचदेवा ने कहा कि गैर-कानूनी व्यापार से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक, कानून पर अमल और लोगों में जागरूकता लाने जैसे ‘सभी के मिले-जुले प्रयासों’ की जरूरत है।

इस कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश मनमोहन सरीन, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू और फिक्की कास्केड के चेयरमैन अनिल राजपूत भी मौजूद थे।

फिक्की कास्केड के अध्यक्ष अनिल राजपूत ने कहा कि गैर-कानूनी व्यापार के खिलाफ लड़ाई सिर्फ़ आर्थिक या राजस्व का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह शांति और स्थिरता से जुड़ी ‘‘सुरक्षा और शासन की ज़रूरत’’ भी है।

भाषा

सुरेश नरेश

नरेश