फसल कटाई के मौसम में पराली जलाने पर रोक के लिए कार्य योजनाओं को लागू करना अनिवार्य

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फसल कटाई के मौसम में पराली जलाने पर रोक के लिए कार्य योजनाओं को लागू करना अनिवार्य

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  • Publish Date - February 16, 2026 / 08:33 PM IST,
    Updated On - February 16, 2026 / 08:33 PM IST

नयी दिल्ली, 16 फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और आसपास के इलाकों में, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने 2026 की फसल कटाई के मौसम में पराली जलाने पर रोक और इस परंपरा को खत्म करने के उद्देश्य से कार्य योजनाओं के समन्वित और समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए वैधानिक निर्देश जारी किया है।

यह निर्देश पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों को जारी किया गया है तथा दिल्ली और राजस्थान की सरकारों से भी सहायक प्रयासों की अपेक्षा की गई है।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग द्वारा जारी निर्देशों में गेहूं की पराली के प्रस्तावित प्रबंधन के लिए सभी गांवों में प्रत्येक खेत का सर्वेक्षण करना, किसानों के समूह के लिए विशिष्ट नोडल अधिकारियों को नियुक्त करना और जिले के सभी किसानों को शामिल करना शामिल है।

इन निर्देशों में राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने को भी कहा गया है कि किसानों को मुख्य रूप से फसल कटाई के मौसम में फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनों का अधिकतम उपयोग और समय पर उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इससें कहा गया है कि इन उपायों में मोबाइल ऐप, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों के लिए सीआरएम मशीनों की किराया-मुक्त उपलब्धता अनिवार्य करना शामिल है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘फसल अवशेषों को जलाने से स्थानीय स्तर पर और पूरे एनसीआर तथा आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता में गिरावट आती है, इसलिए इसके लिए सुनियोजित मौसमी तैयारियों की आवश्यकता है। गेहूं की कटाई के मौसम (अप्रैल-मई 2025) के दौरान उपग्रह आधारित निगरानी से पूरे क्षेत्र में, पराली जलाने की घटनाएं सामने आई थीं। इससे धान के मौसम के मौजूदा उपायों के साथ-साथ गेहूं के मौसम के लिए लक्षित हस्तक्षेपों की आवश्यकता महसूस हुई।’’

अधिकारी ने कहा, ‘‘आयोग ने संबंधित राज्यों को फसल अवशेष जलाने पर नियंत्रण और इस परंपरा को समाप्त करने के लिए एक व्यापक ढांचा प्रदान किया था और उन्हें इस ढांचे की प्रमुख रूपरेखा के आधार पर विस्तृत राज्य-विशिष्ट कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया था।’’

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) द्वारा विकसित मानक प्रोटोकॉल के अनुसार, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के एनसीआर जिलों में गेहूं की कटाई के मौसम (1 अप्रैल से 31 मई 2025) के दौरान पराली जलाने की घटनाएं क्रमशः 10,207, 1,832 और 259 सामने आई थीं।

राज्यों को पराली की एक मजबूत और निरंतर आपूर्ति श्रृंखला स्थापित करने के लिए कहा गया है, ताकि इसे खेत से हटाने के बाद चारे के रूप में इसका इस्तेमाल किया जा सके।

अधिकारी के अनुसार, प्रत्येक जिले के लिए वर्ष भर की मांग और आपूर्ति को ध्यान में रखते हुए जिला स्तरीय आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन योजना तैयार की जाएगी।

भाषा सुभाष अविनाश

अविनाश