कोलकाता, 16 फरवरी (भाषा) निर्वाचन आयोग ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे एसआईआर प्रक्रिया के प्रपत्र-सात के तहत दायर दावों और आपत्तियों का शीघ्र निपटान सुनिश्चित करें। एक वरिष्ठ निर्वाचन अधिकारी ने यह जानकारी दी।
आयोग ने दोहराया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम की सूचना 10 फरवरी को ही राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय को दे दी गई थी।
निर्वाचन आयोग द्वारा उन मतदाताओं को प्रपत्र-सात आवेदन जारी किये गये थे, जिनके नाम मसौदा मतदाता सूची में शामिल नहीं थे। इन आवेदनों में आपत्ति दर्ज कराने की अनुमति थी, जिसमें पते में बदलाव के कारण अपना नाम हटवाना और मृत्यु या स्थानांतरण के कारण दूसरों का नाम हटवाना शामिल था।
पत्र में कहा गया है, ‘‘आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को निर्देश दिया है कि सीईओ और जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) के कार्यालयों में अब तक प्राप्त सभी आपत्तियों को 16 फरवरी तक संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (एईआरओ) को भेज दिया जाये।’’
इस निर्देश में प्रपत्र-सात आपत्तियों के रिकॉर्ड को कथित तौर पर जलाने की खबरों का हवाला दिया गया है, जिस मुद्दे पर आयोग ने संज्ञान लिया है।
ऐसी खबरें आई हैं कि कुछ राजनीतिक दल चुनावी फायदे के लिए गलत डाटा अपलोड करके वैध मतदाताओं के नाम हटाने के लिए प्रपत्र-सात का इस्तेमाल कर रहे थे।
अधिकारी ने कहा कि दिल्ली में निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन आयोग को पार्टियों द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदनों में वास्तविक रूप से सूचीबद्ध न किये गये मतदाताओं की संख्या पर भी सवाल उठाये गये।
पश्चिम बंगाल के सीईओ को भेजा गया नोटिस इसी पृष्ठभूमि में आया है, हालांकि न तो आयोग और न ही सीईओ के कार्यालय ने अपने पत्र में इन घटनाक्रमों का उल्लेख किया है।
निर्वाचन आयोग के सचिव सुजीत कुमार मिश्रा द्वारा सीईओ के कार्यालय को जारी पत्र में आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि सभी दावों और आपत्तियों का निपटारा निर्धारित ढांचे और समय सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
पत्र में सीईओ के कार्यालय को यह भी निर्देश दिया गया कि वह उच्चतम न्यायालय के नौ फरवरी के आदेश के साथ-साथ 27 अक्टूबर, 2025 के एसआईआर निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करे।
उच्चतम न्यायालय ने नौ फरवरी को निर्वाचन आयोग को बताया था कि आपत्तियों के लिए समय सीमा 14 फरवरी से एक सप्ताह तक बढ़ाई जा सकती है और आपत्तियों के शीघ्र निपटान और समाधान का निर्देश दिया।
भाषा
देवेंद्र सुरेश
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