लखीमपुर खीरी में तीन गैंडो को को बाड़े से निकालकर दुधवा के खुले जंगलों में छोड़ा गया

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लखीमपुर खीरी में तीन गैंडो को को बाड़े से निकालकर दुधवा के खुले जंगलों में छोड़ा गया

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  • Publish Date - March 24, 2026 / 08:38 AM IST,
    Updated On - March 24, 2026 / 08:38 AM IST

लखीमपुर खीरी (उप्र), 24 मार्च (भाषा) लखीमपुर खीरी दुधवा बाघ अभ्यारण्य (डीटीआर) के अधिकारियों ने तीन गैंडों हर्ष, सुषमा और राशि को बाड़े से निकालकर दुधवा के खुले जंगलों में सफलतापूर्वक छोड़ दिया। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि सोमवार को दिनभर चले अभियान के बाद तीनों गैंडों को छोड़ा गया जबकि तीन और गैंडों को खुले में छोड़ा जाना है, जिसके लिए मंगलवार को फिर से प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

क्षेत्रीय निदेशक और मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) डॉ. एच. राजमोहन ने बताया कि उत्तर प्रदेश वन विभाग के निर्णय के तहत दुधवा के कुल 10 गैंडों को अलग-अलग चरणों में खुले जंगलों में छोड़ा जाना है, ताकि उनमें आनुवंशिक विविधता को मजबूत किया जा सके।

डॉ. राजमोहन ने बताया कि चार गैंडों को पहले ही दो चरण में खुले जंगल में छोड़ा जा चुका है। पहला चरण नवंबर 2024 में और दूसरा मार्च 2025 में पूरा हुआ था।

उन्होंने कहा कि गहन निगरानी के बाद, शेष छह गैंडों को 22 से 28 मार्च के बीच खुले जंगल में छोड़ने का निर्णय लिया गया है। इसके बाद दुधवा के 10 गैंडों को खुले जंगल में छोड़ने का निर्धारित लक्ष्य पूरा हो जाएगा।

असम के प्रख्यात गैंडा विशेषज्ञ और पद्मश्री पुरस्कार विजेता डॉ. के.के. शर्मा की देखरेख में, निगरानी दलों ने सोमवार को बाड़ से घिरे गैंडा पुनर्वास क्षेत्र में तीन निर्धारित गैंडों को चिह्नित किया।

डीटीआर के अधिकारियों ने बताया कि विशेषज्ञों ने उन्हें बेहोश किया और तकनीकी टीमों ने उनके गले में रेडियो कॉलर पहनाए, जिसके बाद उन्हें खुले में छोड़ दिया गया।

उन्होंने बताया कि डीटीआर के फील्ड निदेशक डॉ. एच. राजमोहन, उप निदेशक जगदीश आर., डॉ. अमित शर्मा, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के डॉ. मुदित गुप्ता और डॉ. जी. अरिंद्रान, पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. दया शंकर, डॉ. मोहम्मद तलहा और डॉ. दीपक वर्मा और अन्य ने इस अभियान को अंजाम दिया।

भाषा सं आनन्द शोभना जोहेब

जोहेब