चेन्नई, दो सितंबर (भाषा) तमिलनाडु में कोविड-19 लॉकडाउन के चलते एक बड़े अंतराल के बाद शराब मिलना शुरू होने के बाद इसके अत्यधिक और नियमित सेवन से बड़ी संख्या में पुरुष ”शराब जनित मनोविकारों” का शिकार हुए हैं। यह वह मानसिक अवस्था है जिसमें सोचने, समझने की क्षमता कमजोर हो जाती है और व्यक्ति अजीब व्यवहार करने लगता है । एक विशेषज्ञ ने बुधवार को यहां यह जानकारी दी।
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान (आईएमएच) में मनोचिकित्सा की सहायक प्रोफेसर डॉक्टर डी देवी ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान कोई विकल्प बाकी न रहने पर कई लोगों को काफी समय तक शराब छोड़नी पड़ी थी।
आईएमएच चेन्नई में मानसिक स्वास्थ्य का जाना-माना संस्थान है, जो 200 साल से भी अधिक पुराना है। यह सबसे बड़े और पुराने सरकारी संस्थानों में से एक है।
देवी ने कहा, ”जब कुछ लोगों ने दोबारा नियमित और अत्यधिक शराब पीनी शुरू की तो उन्हें दिक्कतें आने लगीं और हमारी मदद मांगने लगे। अगर उन्होंने फिर से शराब को नहीं छुआ होता, तो यह नौबत न आती।”
उन्होंने महीनों के अंतराल के बाद अत्यधिक शराब पीने वाले एक व्यक्ति के मामले का हवाला देते हुए कहा, ”इस व्यक्ति की नींद उड़ गई, बेचैन रहने लगा, बेशुमार बोलने लगा और इधर-उधर घूमने लगा। यह सब शराब जनित मनोविकार (एआईपी) का नतीजा था।”
देवी ने कहा, ”यह मनोविकार एक ऐसी मानसिक अवस्था है जिसमें सोचने, समझने की क्षमता कमजोर हो जाती है और व्यक्ति अजीब व्यवहार करने लगता है।”
उन्होंने कहा कि लॉकडाउन पाबंदियों के चलते महीनों तक शराब का सेवन नहीं कर पाने वाले 40 वर्षीय ऑटो रिक्शा चालक ने जब पाबंदियों में ढील के बाद शराब पीनी शुरू की तो अत्यधिक सेवन के चलते वह इस मनोविकार का शिकार हो गया।
मनोचिकित्सक ने कहा, ”दुख की बात यह है कि उसके परिवार को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। उसकी पत्नी तीमारदार के तौर पर अस्पताल में है जबकि बच्चों को रिश्तेदारों के यहां रहना पड़ा। शराब के अत्यधिक और नियमित सेवन के चलते न केवल वह व्यक्ति बल्कि उसका परिवार भी प्रभावित हुआ। ”
देवी ने कहा, ”हमने कई काफी पुरुषों में ऐसी समस्याएं पाईं, जिन्होंने बिना दिन-रात देखे शराब का अत्यधिक सेवन किया।”
उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की पत्नियों ने डॉक्टरों से उन्हें भर्ती करने की गुहार लगाई क्योंकि उनका व्यवहार बर्दाश्त करने लायक नहीं रह गया था।
भाषा जोहेब पवनेश
पवनेश