राज्यसभा में कांग्रेस ने अमेरिका के साथ करार के मद्देनजर पूरक या संशोधित बजट पेश करने की मांग की

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राज्यसभा में कांग्रेस ने अमेरिका के साथ करार के मद्देनजर पूरक या संशोधित बजट पेश करने की मांग की

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  • Publish Date - February 11, 2026 / 05:41 PM IST,
    Updated On - February 11, 2026 / 05:41 PM IST

नयी दिल्ली, 11 फरवरी (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को कांग्रेस सदस्य राजीव शुक्ला ने कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के बाद की परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार को पूरक या संशोधित बजट पेश करना चाहिए।

उच्च सदन में बजट पर चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस सदस्य शुक्ला ने कहा कि मौजूदा बजट पेश होने के बाद अमेरिका के साथ व्यापार समझौता हुआ जिसके तहत भारत को करीब 45 लाख करोड़ रुपये की खरीदारी करनी है। उन्होंने कहा कि इस खरीदारी में रक्षा क्षेत्र से जुड़ी खरीदारी शामिल नहीं होगी।

उन्होंने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि उसके सदस्यों ने डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने पर खुशी जतायी थी लेकिन यह बदले हुए ट्रंप हैं। उन्होंने सवाल किया कि ट्रंप के साथ भाजपा की इतनी मित्रता क्यों थी?

शुक्ला ने कहा कि अमेरिका के साथ करार को बेहतरीन बताया जा रहा है जबकि वास्तविकता यह है कि करार अमेरिका के पक्ष में झुका हुआ है। उन्होंने कहा कि इस करार के साथ ही निगरानी की भी बात की गयी है कि अगर भारत ने रूस से तेल खरीदा तो उस पर पेनाल्टी लगायी जाएगी।

उन्होंने कहा कि भारत को रूस के बदले अब वेनेजुएला से तेल खरीदना होगा जिससे एक ओर ढुलाई खर्च बढ़ेगा वहीं उस तेल के शोधन में परेशानी आएगी। उन्होंने कहा कि ऐसे में भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।

शुक्ला ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वह भारत को विश्वगुरू बनाने की बात कर रही है लेकिन यह कैसा गुरू है जिसका कोई शिष्य ही नहीं है। उन्होंने कहा कि आश्रम खोल कर बैठे हैं लेकिन कोई शिष्य ही नहीं बन रहा है।

उन्होंने भारत की विदेश नीति पर निशाना साधते हुए कहा कि बांग्लादेश के साथ संबंधों पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि बदली परिस्थिति में पाकिस्तान और बांग्लादेश एक साथ आ रहे हैं और वह स्थिति भारत के लिए परेशानी पैदा करेगी।

शुक्ला ने कहा कि सरकार से अच्छा काम तो आईसीसी (अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद) कर रही है जिसने पाकिस्तान के साथ बातचीत के जरिए क्रिकेट मैच से जुड़ा मुद्दा सुलझा लिया।

चर्चा में भाग लेते हुए तृणमूल कांग्रेस सदस्य साकेत गोखले ने बजट की आलोचना करते हुए कहा कि पहले बजट ‘‘नीति उन्मुख होते थे, अब व्यक्तित्व उन्मुख हैं।’’ उन्होंने कहा कि बजट में युवाओं के लिए कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को गौर करना चाहिए कि भारत से बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई के लिए विदेश क्यों जा रहे हैं।

गोखले ने देश में शोध एवं अनुसंधान पर जोर देने की मांग करते हुए कहा अमेरिका, दक्षिण कोरिया, चीन जैसे देश अपनी जीडीपी का एक बड़ा हिस्सा अनुसंधान पर खर्च करते हैं। उन्होंने भारत के विश्वविद्यालयों को कोष एवं स्वायत्तता देने की मांग करते हुए कहा कि उनके राज्य पश्चिम बंगाल ने इस पर जोर दिया है।

आम आदमी पार्टी के राजेंद्र गुप्ता ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि सरकार को लोक खर्च बढ़ाना होगा और शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर विशेष जोर देना होगा।

वाईएसआर सीपी सदस्य एस निरंजन रेड्डी ने वित्तीय अनुशासित राज्यों को प्रोत्साहित करने तथा देश में मौजूद सोने के व्यापक भंडार के इस्तेमाल पर जोर दिया।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के संजय यादव ने बजट को औपचारिकता मात्र बताते हुए कहा कि यह अमीरों के लिए उपहार लेकिन गरीबों के लिए भार है। देश में आर्थिक असमानता में भारी वृद्धि होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह बजट आम आदमी की आमदनी घटाने वाला और उनकी परेशानी बढ़ाने वाला है।

राजद सदस्य ने कहा कि देश में बेरोजगारी चरम पर है लेकिन बजट में नौकरी शब्द का सिर्फ दो बार उल्लेख है।

बीआरएस सदस्य केआर सुरेश रेड्डी ने कहा कि जीडीपी में कृषि क्षेत्र का योगदान घटकर 3.5 प्रतिशत रह गया है वहीं उत्पादन भी कम हो रहा है जो चिंता की बात है। उन्होंने पिछले साल तेलंगाना में हल्दी बोर्ड की स्थापना किए जाने की चर्चा करते हुए कहा कि इस बजट में उसके लिए कोई राशि नहीं दी गई है।

रेड्डी ने खादी बोर्ड को एकमुश्त अनुदान देने की भी मांग की और कहा कि बाजार में टिके रहने के लिए बोर्ड को मदद जरूरी है।

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के हारिस बीरन ने कहा कि बजट में इस बात की कोई योजना नहीं घोषित की गयी है कि देश के किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी कैसे बनाया जाए?

उन्होंने आरोप लगाया कि इस बार के बजट में यदि दुर्लभ खनिज घोषणा को छोड़ दिया जाए तो केरल के लिए कोई घोषणा नहीं की गयी है।

बीरन ने कहा कि पिछले साल के बजट में जो घोषणाएं की गयी हैं, उनमें से अधिकतर पर कोई काम नहीं हुआ है।

चर्चा में द्रमुक सदस्य आर गिरिराजन और माकपा सदस्य वी शिवदासन ने भी भाग लिया।

भाषा अविनाश माधव

माधव