संशोधित जांच रिपोर्ट में जवान की मां का हाथ काटे जाने के लिए दो अस्पतालों को जिम्मेदार ठहराया गया

संशोधित जांच रिपोर्ट में जवान की मां का हाथ काटे जाने के लिए दो अस्पतालों को जिम्मेदार ठहराया गया

संशोधित जांच रिपोर्ट में जवान की मां का हाथ काटे जाने के लिए दो अस्पतालों को जिम्मेदार ठहराया गया
Modified Date: May 25, 2026 / 06:10 pm IST
Published Date: May 25, 2026 6:10 pm IST

कानपुर (उप्र), 25 मई (भाषा) आठ दिनों के इंतजार के बाद एक संशोधित चिकित्सा जांच रिपोर्ट में आईटीबीपी के एक जवान की मां के इलाज में कथित तौर पर देरी करने के लिए दो निजी अस्पतालों को ‘गंभीर लापरवाही’ बरतने का दोषी ठहराया गया है, जिसके परिणामस्वरूप उनका हाथ काटना पड़ा। एक शीर्ष पुलिस अधिकारी ने सोमवार को यह बात कही।

पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि अद्यतन जांच रिपोर्ट में निजी अस्पतालों (कृष्णा अस्पताल और पारस अस्पताल) को इलाज में ‘अत्यधिक देरी’ के लिए जिम्मेदार पाया गया जिसके कारण अंततः 56 वर्षीय निर्मला देवी का हाथ काटना पड़ा।

लाल ने कहा कि संशोधित जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 125 (दूसरों के जीवन या सुरक्षा को खतरे में डालना) सहित प्रासंगिक प्रावधानों के तहत दोनों अस्पतालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा रही है।

अद्यतन जांच मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) द्वारा गठित एक टीम द्वारा की गई, जिसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, चिकित्सा विशेषज्ञ और भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के एक चिकित्सक शामिल थे।

आयुक्त ने कहा, ‘पिछली रिपोर्ट अनिर्णायक थी और स्पष्ट रूप से जिम्मेदारी तय नहीं की गई थी। हमने बिंदुवार समीक्षा के साथ एक निर्णायक रिपोर्ट मांगी थी।’

संशोधित जांच रिपोर्ट के अनुसार, दोनों अस्पतालों में इलाज में देरी इतनी गंभीर थी कि पीड़िता को अपनी जान गंवानी पड़ी।

यह मामला तब मीडिया की सुर्खियों में आया जब आठ दिन पहले आईटीबीपी जवान विकास सिंह ने अपनी मां का कटा हुआ हाथ बर्फ के बक्से में रखा और उसे लेकर पुलिस आयुक्त के कार्यालय में पहुंचे। विकास ने अस्पतालों के खिलाफ बार-बार शिकायतों के बावजूद पुलिस पर निष्क्रियता बरतने का आरोप लगाया।

सिंह ने आरोप लगाया था कि उनकी मां निर्मला देवी को सांस लेने में तकलीफ के बाद 13 मई को कृष्णा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान कथित तौर पर एक इंजेक्शन के कारण उनके दाहिने हाथ में गंभीर सूजन और संक्रमण हो गया था।

बाद में उन्हें पारस अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां चिकित्सकों ने कथित तौर पर परिवार को सूचित किया कि संक्रमण बड़े पैमाने पर फैल गया है और हाथ काटना ही एकमात्र विकल्प है। इसके बाद 17 मई को उनका हाथ काट दिया गया।

कमिश्नरी में रोते हुए सिंह ने कहा था कि यह वही हाथ है जिससे उनकी मां उन्हें खाना खिलाती थीं।

पुलिस और आईटीबीपी के बीच कथित गतिरोध की खबर का लाल ने खंडन किया।

लाल ने कहा, ‘पुलिस और आईटीबीपी के बीच कोई गतिरोध या असहमति नहीं थी।’ उन्होंने कहा कि आईटीबीपी कमांडेंट गौरव और बल के चिकित्सा अधिकारी को जांच निष्कर्षों से संबंधित चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया था।

हालांकि, उन्होंने कहा कि कार्यालय के बाहर जवानों की एक बड़ी टुकड़ी के पहुंचने से पुलिस और अर्धसैनिक बल के बीच असहमति की ‘भ्रामक धारणा’ पैदा हुई।

आयुक्त ने कहा कि आईटीबीपी मुख्यालय और उसके महानिदेशक को एक रिपोर्ट भेजी गई है जिसमें ‘प्रक्रियात्मक चूक’ के लिए विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की गई है।

हालांकि, कमांडेंट गौरव ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उन्हें आईटीबीपी मुख्यालय या महानिदेशक को भेजे गए ऐसे किसी पत्र की जानकारी नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘अभी तक मेरे वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मुझसे कोई स्पष्टीकरण नहीं मांगा गया है। यदि ऐसा कोई पत्र भेजा गया है, तो उच्च अधिकारियों द्वारा इसकी जांच की जाएगी।’

शनिवार को आयुक्तालय के बाहर आईटीबीपी कर्मियों की भारी तैनाती से अफवाहें फैल गईं कि बल ने कार्यालय को ‘घेर लिया’ है, लेकिन पुलिस और आईटीबीपी, दोनों ने ही इन दावों का खंडन किया और कहा कि बैठक पहले से निर्धारित थी।

भाषा

सं जफर रवि कांत संतोष

संतोष


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