उत्तराखंड में अनेक स्थानों पर बारिश, आपदाग्रस्त स्थानों पर खोजबीन और राहत अभियान जारी

उत्तराखंड में अनेक स्थानों पर बारिश, आपदाग्रस्त स्थानों पर खोजबीन और राहत अभियान जारी

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  • Publish Date - August 25, 2025 / 05:47 PM IST,
    Updated On - August 25, 2025 / 05:47 PM IST

देहरादून, 25 अगस्त (भाषा) उत्तराखंड के अनेक स्थानों पर सोमवार को भी बारिश होती रही जबकि प्रदेश में धराली और थराली सहित अन्य आपदाग्रस्त जगहों पर राहत एवं बचाव अभियान जारी रहा।

मौसम विभाग द्वारा प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश का पूर्वानुमान व्यक्त करते हुए ‘आरेंज अलर्ट’ जारी किया गया था जिसके मददेनजर देहरादून, उत्तरकाशी, नैनीताल तथा चमोली सहित अनेक जिलों में स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया।

रुक-रुक कर लगातार हो रही बारिश के बीच उत्तरकाशी जिले के आपदाग्रस्त धराली और चमोली जिले के थराली में सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, भारत तिब्बत सीमा पुलिस के अलावा राज्य सरकार की विभिन्न एजेंसियों द्वारा खोजबीन एवं राहत बचाव अभियान जारी है।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) ने बताया कि धराली के प्रभावित क्षेत्रों में कई हेलीकॉप्टर के जरिए प्रतिदिन राशन और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति की जा रही है। हालांकि, सोमवार को मौसम खराब होने के कारण हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सके ।

एसईओसी ने बताया कि बारिश की स्थिति को देखते हुए उत्तरकाशी जिला प्रशासन को 15 दिनों के राशन के भंडारण के निर्देश दिए गए हैं। धराली में पांच अगस्त को खीरगाड़ बरसाती नाले में आयी भीषण बाढ़ में लगभग आधा गांव तबाह हो गया था ।

हर्षिल में भागीरथी नदी का जलप्रवाह रूकने से बनी झील से जल निकासी हो रही है, लेकिन जल निकासी की मात्रा को बढ़ाने के लिए सेना, जिला प्रशासन और एसडीआरएफ द्वारा जेसीबी मशीन आदि के जरिये प्रयास किया जा रहा है।

एसईओसी ने बताया कि हर्षिल-धराली मार्ग के 150-200 मीटर हिस्से में अब भी पानी भरा हुआ है जिस पर सेना ‘हैस्को बॉक्स’ लगाकर एक वैकल्पिक पैदल मार्ग का निर्माण कर रही है ।

इसके अनुसार, रविवार देर शाम हर्षिल में सेना के शिविर के सामने स्थित तेलगाड़ बरसाती नाले में बारिश के कारण पानी का बहाव बढ़ गया जिसके बाद वहां से सेना के जवानों तथा वहां काम करने वाली अन्य एजेंसियों के कार्मिकों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया।

उसके बाद रात में भी तेलगाड़ नाले से भारी मात्रा में पानी और मलबा आया जिसे देखते हुए प्रशासन को ड्रोन से तेलगाड़ के उपरी इलाकों में तत्काल सर्वेक्षण करने तथा सुरक्षात्मक उपाय उठाने को कहा गया है।

दूसरी ओर, उत्तरकाशी जिले के बड़कोट क्षेत्र में यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्यानाचट्टी में यमुना नदी पर बनी झील से लगातार पानी निकाला जा रहा है और फिलहाल पानी का जलस्तर पुल से करीब तीन फुट नीचे है ।

इक्कीस अगस्त की शाम को भारी बारिश के दौरान गढ़गाड़ बरसाती नाले में आए मलबे से स्यानाचट्टी में यमुना के प्रवाह में अवरोध पैदा होने से एक अस्थायी झील बन गयी जिससे कई होटल और मकान जलमग्न हो गए थे तथा पुल का कुछ हिस्सा भी डूब गया था।

एसईओसी के अनुसार, पुल पर आवागमन शुरू हो चुका है तथा नियंत्रित तरीके से झील से पानी की निकासी की जा रही है। हालांकि, गढ़गाड़ बरसाती नाले से अब भी पानी और मलबा आ रहा है।

झील से प्रभावित हुए लोगों के भोजन तथा ठहरने की व्यवस्था प्रशासन द्वारा की जा रही है ।

यमुनोत्री राजमार्ग जगह-जगह मलबा आने तथा सड़क धंसने के कारण पिछले चार दिन से बंद है। राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिशासी अभियंता मनोज रावत ने कहा कि बार-बार भूस्खलन होने से मार्ग खोलने में दिक्कत आ रही है, लेकिन उसे जल्द सुचारु करने के प्रयास जारी हैं।

दूसरी तरफ, गंगोत्री राजमार्ग पर नलूणा के पास भारी भूस्खलन होने से मार्ग बाधित हो गया। अधिकारियों ने बताया कि लगातार भूस्खलन होने से सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस ने दोनों तरफ बैरीकेडिंग कर यातायात को रोक दिया है।

एसईओसी के अनुसार, चमोली जिले के थराली में शुक्रवार मध्यरात्रि के बाद भारी बारिश से टूनरी गाड़ में आयी बाढ़ के मलबे से प्रभावित हुए परिवारों के लिए तीन राहत शिविर बनाए गए हैं।

उनमें रह रहे 83 लोगों के लिए प्रशासन द्वारा भोजन तथा अन्य जरूरी वस्तुओं की व्यवस्था की गयी है।

प्रभावित क्षेत्र में मलबा साफ करने का काम युद्धस्तर पर किया जा रहा है। चमोली के जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने बताया कि थराली में आपदा से प्रभावित हुई सड़कों को लगभग दुरुस्त कर दिया गया है और शीघ्र ही सभी आधारभूत व्यवस्थाएं सुचारु कर दी जाएंगी।

पिथौरागढ़ जिले के देवात गांव में रविवार रात भारी बारिश के बाद पहाड़ से दोबारा बोल्डर गिरना शुरू हो गए जिसके कारण वहां रह रहे करीब 79 परिवारों को वहां से हटाकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया।

पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी विनोद गोस्वामी ने कहा कि पहाड़ से बड़े-बड़े पत्थर गिरने की वजह से गांव वालों को पास ही स्थित दो बारातघरों में ठहराया गया है। उन्होंने बताया कि प्रशासन पहाड़ के ऊपर की जगह का स्थिरीकरण करने का प्रयास करेगा।

पिछले सप्ताह इसी जगह एक मकान पर बोल्डर गिरने से उसमें सो रहे एक 12 वर्षीय लड़के की मृत्यु हो गयी थी तथा उसके परिवार के चार अन्य लोग घायल हो गए थे।

भाषा दीप्ति संतोष

संतोष