भारत और जर्मनी ने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीतिक संबंधों के विस्तार का निर्णय लिया

भारत और जर्मनी ने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीतिक संबंधों के विस्तार का निर्णय लिया

भारत और जर्मनी ने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीतिक संबंधों के विस्तार का निर्णय लिया
Modified Date: January 12, 2026 / 10:28 pm IST
Published Date: January 12, 2026 10:28 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

अहमदाबाद/नयी दिल्ली, 12 जनवरी (भाषा) भारत और जर्मनी ने सोमवार को रक्षा, व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के उपायों की घोषणा की। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने बढ़ती भूराजनीतिक चुनौतियों से संयुक्त रूप से निपटने के लिए समग्र द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का संकल्प लिया।

मोदी और मर्ज के बीच हुई बातचीत के बाद, दोनों पक्षों ने रक्षा औद्योगिक सहयोग के लिए एक रोडमैप और उच्च शिक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक रोडमैप सहित 19 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। दूरसंचार क्षेत्र में सहयोग को लेकर एक अलग समझौता भी किया गया।

 ⁠

दोनों नेताओं ने समग्र व्यापार विस्तार के लिए भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने की वकालत की। इसके साथ ही, भारत और जर्मनी के लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा देने के लिए भारतीय पासपोर्ट धारकों के वास्ते जर्मनी से गुजरने के लिए वीजा-मुक्त पारगमन की घोषणा की गई।

जर्मन नेता अपने साथ एक बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल को लेकर सोमवार सुबह अहमदाबाद पहुंचे। वह दो दिवसीय भारत यात्रा पर हैं। जर्मन चांसलर के रूप में एशिया की यह उनकी पहली यात्रा है।

मोदी ने मीडिया के लिए अपने बयान में कहा, ‘‘रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़ता सहयोग हमारे आपसी विश्वास और साझा दृष्टिकोण का प्रतीक है। रक्षा व्यापार से संबंधित प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए मैं चांसलर मर्ज के प्रति हार्दिक आभार जताता हूं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम अपने रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए एक रोडमैप पर भी काम करेंगे, जिससे सह-विकास और सह-उत्पादन के नये अवसर खुलेंगे।’’

वार्ता में, मोदी और मर्ज ने एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की, संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (यूएनसीएलओएस) सहित अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की बात कही और एक नये द्विपक्षीय हिंद-प्रशांत परामर्श तंत्र की घोषणा की।

यह कदम क्षेत्र में चीन द्वारा लगातार प्रदर्शित की जा रही सैन्य शक्ति के बीच आया है।

मोदी और मर्ज ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के लिए अपने मजबूत समर्थन की भी पुष्टि की, और वैश्विक वाणिज्य, संपर्क एवं समृद्धि को नया आकार देने तथा बढ़ावा देने में इसकी परिवर्तनकारी क्षमता पर जोर दिया।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष जलवायु, ऊर्जा, शहरी विकास और शहरी गतिशीलता जैसे क्षेत्रों में संयुक्त रूप से नयी परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘दोनों देशों की कंपनियों को शामिल करने वाली हरित हाइड्रोजन की नयी मेगा परियोजना भविष्य की ऊर्जा के लिए परिवर्तनकारी साबित होगी।’’

मोदी ने कहा, ‘‘भारत और जर्मनी सुरक्षित, भरोसेमंद और लचीली आपूर्ति शृंखलाओं के निर्माण के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि बढ़ते व्यापार और निवेश संबंधों ने भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी में ‘‘नयी ऊर्जा’’ का संचार किया है।

मोदी ने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार अब तक के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है और 50 अरब अमेरिकी डॉलर का आंकड़ा पार कर गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘2,000 से अधिक जर्मन कंपनियां लंबे समय से भारत में मौजूद हैं। यह भारत में उनके अटूट विश्वास और यहां मौजूद अपार अवसरों को दर्शाता है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि ‘‘आतंकवाद पूरी मानवता के लिए एक गंभीर खतरा है’’ और भारत तथा जर्मनी ‘‘पूर्ण दृढ़ संकल्प’’ के साथ मिलकर इसका मुकाबला करना जारी रखेंगे।

वहीं, मर्ज ने अपने संबोधन में, दोनों देशों के लोगों के आपसी संबंधों के बारे में विस्तार से बात की और कहा कि भारत से कुशल श्रमिकों, जिनमें देखभाल करने वाले और नर्स शामिल हैं, की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है।

मोदी-मर्ज वार्ता के बाद कौशल साझेदारी पर हुए समझौते से जर्मनी में अधिक भारतीय स्वास्थ्य पेशेवरों की आवाजाही के सुगम होने की उम्मीद है, जहां लगभग तीन लाख भारतीय प्रवासी और 60 हजार छात्र रहते हैं।

मर्ज ने कहा, ‘‘हम देख रहे हैं कि महाशक्तियां आपूर्ति शृंखलाओं और कच्चे माल का इस्तेमाल शक्ति प्रदर्शन के साधन के रूप में तेजी से कर रही हैं। हम सब मिलकर इसका विरोध करना चाहते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम अपनी आपूर्ति शृंखलाओं की एकतरफा निर्भरता को कम करते हैं और इससे हमारी दोनों अर्थव्यवस्थाएं अधिक लचीली बनती हैं।’’

मोदी ने अपने संबोधन में हिंद-प्रशांत क्षेत्र को दोनों देशों के लिए ‘‘उच्च प्राथमिकता’’ वाला क्षेत्र बताया।

दोनों नेताओं ने यूक्रेन में संघर्ष और गाजा की स्थिति सहित कई वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।

मोदी ने कहा, ‘‘भारत सभी समस्याओं और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का पक्षधर रहा है और इस दिशा में किए जा रहे सभी प्रयासों का समर्थन करता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘भारत और जर्मनी की जनता के बीच ऐतिहासिक और गहन संबंध हैं। रवींद्रनाथ टैगोर की रचनाओं ने जर्मनी के बौद्धिक जगत को नयी दृष्टि दी। स्वामी विवेकानंद की विचारधारा ने जर्मनी सहित पूरे यूरोप को प्रेरित किया। और मैडम कामा ने जर्मनी में पहली बार भारत की आजादी का ध्वज फहराकर हमारी स्वतंत्रता की आकांक्षा को वैश्विक पहचान दी।’’

मोदी ने कहा, ‘‘भारत और जर्मनी इस बात पर सहमत हैं कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक संस्थानों में सुधार करना बेहद जरूरी है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार के लिए जी4 समूह के माध्यम से किए गए हमारे संयुक्त प्रयास इस साझा विश्वास का प्रमाण हैं।’’

प्रतिभाओं की आवाजाही के विषय पर प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रवासन, आवाजाही और कौशल विकास को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि भारत का प्रतिभाशाली युवा कार्यबल जर्मनी की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

मोदी ने कहा कि उच्च शिक्षा पर व्यापक रोडमैप शिक्षा क्षेत्र में साझेदारी को एक नयी दिशा देगा।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं जर्मन विश्वविद्यालयों को भारत में अपने परिसर खोलने के लिए आमंत्रित करता हूं।’’

संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों नेताओं ने सीमा पार सभी तरह के आतंकवाद सहित हिंसक उग्रवाद की स्पष्ट और दृढ़ निंदा की तथा आतंकवाद से व्यापक और निरंतर तरीके से निपटने के लिए समन्वित अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का आह्वान किया।

इसमें कहा गया कि मोदी और मर्ज ने पिछले साल अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के साथ-साथ नवंबर में दिल्ली में हुई आतंकी घटना की भी कड़ी निंदा की।

बयान में कहा गया, ‘‘वे आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिनमें संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध समिति में सूचीबद्ध संगठन भी शामिल हैं।’’

इसमें कहा गया, ‘‘दोनों पक्षों ने सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार आतंकी पनाहगाहों और बुनियादी ढांचे को खत्म करने के साथ-साथ आतंकी नेटवर्क और वित्तपोषण को ध्वस्त करने की दिशा में काम जारी रखने का आह्वान किया।’’

भाषा नेत्रपाल पारुल

पारुल


लेखक के बारे में