चीन की चिंताओं के बीच भारत और अमेरिका ने महत्वपूर्ण खनिज समझौते पर हस्ताक्षर किए

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चीन की चिंताओं के बीच भारत और अमेरिका ने महत्वपूर्ण खनिज समझौते पर हस्ताक्षर किए

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  • Publish Date - May 26, 2026 / 01:28 PM IST,
    Updated On - May 26, 2026 / 01:28 PM IST

नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) भारत और अमेरिका ने मंगलवार को महत्वपूर्ण खनिजों की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सहयोग को लेकर एक प्रमुख रूपरेखा को अंतिम रूप दिया।

भारत-अमेरिका के बीच यह कदम वैश्विक प्रौद्योगिकी आपूर्ति शृंखलाओं के लिए महत्वपूर्ण दुर्लभ पृथ्वी तत्वों और रणनीतिक धातुओं पर चीन के निर्यात नियंत्रणों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आया है।

नयी दिल्ली में क्वाड (चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद) के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान महत्वपूर्ण खनिजों के खनन और प्रसंस्करण की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक रूपरेखा पर हस्ताक्षर किए गए।

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो की उपस्थिति में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, ‘‘यह सही समय पर किया गया और महत्वपूर्ण कदम है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इस रूपरेखा का उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ खनिज आपूर्ति शृंखला के पूरे क्षेत्र में हमारे सहयोग को और गहरा करना है, जिसमें खनन, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और संबंधित निवेश शामिल हैं।’’

विदेश मंत्री ने कहा कि यह रूपरेखा लचीली और विविध आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करेगी, परियोजनाओं के वित्तपोषण में मदद करेगी और साथ ही महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ धातुओं के प्रभावी प्रबंधन को सुनिश्चित करेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘यह इस बात का एक और प्रमाण है कि चुनौतियों और अवसरों से भरी दुनिया में हमारा सहयोग कितना घनिष्ठ रहा है।’’

अपने संबोधन में रूबियो ने अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी पर प्रकाश डाला और बताया कि यह दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों के लिए कितनी महत्वपूर्ण है।

उन्होंने समझौते पर हस्ताक्षर का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘यह इसका एक स्पष्ट उदाहरण है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम दो ऐसे देश हैं जिनके रणनीतिक हित हैं कि हमारी नवाचार अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण खनिजों और आपूर्ति शृंखलाओं तक विश्वसनीय दीर्घकालिक पहुंच सुनिश्चित की जाए।’’

रूबियो ने अमेरिका समर्थित ‘पैक्स सिलिका’ पहल का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा, ‘‘इसकी नींव चार फरवरी को रखी गई थी जब आप वाशिंगटन डीसी में आयोजित ‘क्रिटिकल मिनरल्स फोरम’ में हमारे साथ शामिल हुए थे।’’

उन्होंने कहा कि भारत द्वारा ‘पैक्स सिलिका’ पर हस्ताक्षर करने के बाद इसे गति मिली।

भाषा सुरभि वैभव

वैभव