(फाइल फोटो सहित)
नयी दिल्ली, 30 अप्रैल (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि आतंकवाद एक ‘‘विकृत और कुटिल’’ मानसिकता से उत्पन्न होता है। उन्होंने इसके खिलाफ लड़ाई को केवल राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा नहीं बल्कि मानवता के मूल मूल्यों की रक्षा की लड़ाई बताया।
आतंकवाद से मुकाबले के लिए भारत के दृष्टिकोण में आए बदलाव को रेखांकित करते हुए सिंह ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने दुनिया को एक ‘‘स्पष्ट’’ संदेश दिया कि भारत अब आतंकी हमलों के बाद केवल कूटनीतिक बयान जारी करने की ‘‘पुरानी सोच’’ से बंधा नहीं है।
उनकी इन टिप्पणियों को पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की परोक्ष आलोचना के रूप में देखा जा रहा है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उन्होंने एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने केवल इरादों और बयानबाजी से आगे बढ़कर ‘‘निर्णायक कार्रवाई’’ के माध्यम से अपनी अटूट प्रतिबद्धता प्रदर्शित की है।
आतंकवाद को पाकिस्तान के निरंतर समर्थन पर सिंह ने कहा, ‘‘भारत और पाकिस्तान दोनों एक ही समय आजाद हुए। हालांकि आज भारत को वैश्विक स्तर पर आईटी यानी ‘इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी’ के लिए जाना जाता है, जबकि पाकिस्तान को एक अलग तरह की आईटी यानी ‘इंटरनेशनल टेररिज्म’ के केंद्र के रूप में देखा जाता है।’’
उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को भारतीय रक्षा बलों की एकजुटता और तालमेल का एक ‘‘शानदार उदाहरण’’ बताया।
मंत्रालय ने सिंह के हवाले से कहा कि भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना ने एकीकृत योजना के तहत मिलकर काम किया, जिससे यह स्पष्ट रूप से साबित हो गया कि भारत की सैन्य शक्ति अब अलग-थलग नहीं है; बल्कि यह एक संयुक्त, एकीकृत और वैश्विक शक्ति के रूप में उभरी है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार का यह दृढ़ रुख रहा है कि किसी भी परिस्थिति में आतंकवाद के किसी भी कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘आतंकवाद विकृत और कुटिल मानसिकता से उत्पन्न होता है। यह मानवता पर काला धब्बा है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला नहीं है; यह मूल रूप से मानवता के मूलभूत मूल्यों की रक्षा करने की लड़ाई है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह एक बर्बर विचारधारा के खिलाफ लड़ाई है जो हर मानवीय मूल्य के सीधे विरोध में खड़ी है। हमने इस भारतीय दृष्टिकोण को देश के भीतर और विदेशों में भी स्पष्ट रूप से व्यक्त किया है।’’
सिंह की टिप्पणी के एक दिन पहले, कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि रक्षा मंत्री ने बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सम्मेलन में आतंकवाद के विषय पर पाकिस्तान को ‘‘शर्मनाक रूप से क्लीन चीट’’ दी।
कांग्रेस ने सिंह के इस बयान पर भी आपत्ति जताई थी, जिसमें उन्होंने कहा था, ‘‘हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आतंकवाद की कोई राष्ट्रीयता और कोई धर्म नहीं होता। कोई भी शिकायत, चाहे वास्तविक हो या काल्पनिक, आतंकवाद और मानवीय क्षति का बहाना नहीं बन सकती।’’
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सवाल किया, ‘‘क्या पाकिस्तान आतंकवाद का केंद्र नहीं है? क्या पाकिस्तान में ऐसे आतंकी कैंप नहीं हैं, जिनका निशाना भारत है? क्या पाकिस्तान में भारत-विरोधी सोच को बढ़ावा नहीं दिया जाता?’
बृहस्पतिवार को अपने संबोधन में सिंह ने कहा कि जब तक आतंकवाद मौजूद रहेगा, तब तक यह सामूहिक शांति, विकास और समृद्धि के लिए चुनौती बना रहेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘आतंकवाद को धार्मिक रंग देकर या नक्सलवाद जैसी हिंसक विचारधारा से जोड़कर उसे जायज़ ठहराने की कोशिश की जाती है। यह बेहद खतरनाक है और एक तरह से आतंकवादियों को अपने मकसद की ओर धीरे-धीरे बढ़ने में मदद करता है।’’
सिंह ने कहा, ‘‘आतंकवाद केवल देशविरोधी कृत्य नहीं है; इसके कई आयाम होते हैं—संचालनात्मक, वैचारिक और राजनीतिक। इसका समाधान तभी संभव है जब इन सभी पहलुओं से एक साथ निपटा जाए।’’
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अपनी शर्तों और अपने चुने हुए समय पर अंजाम दिया और इसे पूरी तरह अपनी शर्तों पर ही रोका।
उन्होंने कहा, ‘‘ऑपरेशन के दौरान, हमने पूरी सटीकता के साथ केवल उन्हीं को निशाना बनाया जिन्होंने हम पर हमला किया था। हमने ऑपरेशन इसलिए नहीं रोका क्योंकि हमारी क्षमताएं खत्म हो गई थीं या कम हो गई थीं।’’
सिंह ने कहा, ‘‘हमने इसे पूरी तरह अपनी शर्तों पर रोका। हम लंबे समय तक संघर्ष का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार थे। हमारे पास हालात से निपटने की क्षमता है, और अचानक संकट के क्षणों में अपनी क्षमताओं को तेजी से बढ़ाने की अंतर्निहित शक्ति है।’’
सिंह ने कहा कि भारत के सैन्य-औद्योगिक परिसर ने बार-बार यह साबित किया है कि वह न केवल शांति काल की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, बल्कि युद्ध के समय तेज आपूर्ति और अन्य सामग्रियों की मांगों को पूरा करने के लिए भी तत्पर है।
उन्होंने कहा कि उस अवधि के दौरान भारत किसी भी तरह के दबाव या परमाणु हमले की धमकी के झांसे में नहीं आया और निर्धारित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया।
उन्होंने कहा, ‘‘यह ‘नयी विश्व व्यवस्था’ है; इस नए वैश्विक युग का ‘नया भारत’ है। यह ऐसा भारत है जो आतंकवाद और उसे प्रायोजित करने वालों में कोई भेद नहीं करता।’’
रक्षा मंत्री ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को प्रतिरोध की एक मिसाल बताते हुए कहा कि यह अभियान केवल 72 घंटों में पूरा हो गया, लेकिन इससे पहले इसकी तैयारियां अत्यंत व्यापक और लंबे समय तक चली थीं।
भाषा आशीष नरेश
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