अमेरिका के लिए भारत बहुत महत्वूपर्ण, दोनों देश व्यापार समझौते के लिए वार्ता में शामिल : सर्जियो गोर

अमेरिका के लिए भारत बहुत महत्वूपर्ण, दोनों देश व्यापार समझौते के लिए वार्ता में शामिल : सर्जियो गोर

अमेरिका के लिए भारत बहुत महत्वूपर्ण, दोनों देश व्यापार समझौते के लिए वार्ता में शामिल : सर्जियो गोर
Modified Date: January 12, 2026 / 09:53 pm IST
Published Date: January 12, 2026 9:53 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, 12 जनवरी (भाषा) तनाव को दूर कर द्विपक्षीय संबंधों को दोबारा मजबूत करने का संकेत देते हुए दिल्ली में अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने सोमवार को कहा कि वाशिंगटन के लिए भारत जितना आवश्यक कोई अन्य देश नहीं है और दोनों पक्ष व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

अपने आगमन संबोधन में उन्होंने महत्वपूर्ण खनिजों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर अमेरिका के नेतृत्व वाले रणनीतिक गठबंधन ‘पैक्स सिलिका’ में भारत के शामिल होने के लिए निमंत्रण की भी घोषणा की।

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गोर ने कहा कि व्यापार समझौते पर अगली बातचीत मंगलवार को होने वाली है।

उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका और भारत केवल साझा हितों से ही नहीं जुड़े हैं बल्कि यह रिश्ता सर्वोच्च स्तरों पर आधारित है। ’’

उन्होंने उम्मीद जतायी कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले साल या उसके अगले साल भारत की यात्रा करेंगे।

पदभार संभालने के कुछ ही घंटों बाद गोर द्वारा दिए गए इन बयानों को ट्रंप प्रशासन की ओर से ऐसे समय में एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है, जब उसने हाल के महीनों में शुल्क (टैरिफ) और एच-1बी वीजा को लेकर भारत पर दबाव बढ़ा दिया है।

अमेरिकी दूतावास के कर्मचारियों और कुछ पत्रकारों को संबोधित करते हुए गोर ने कहा, ‘‘आपके और मेरे सामने कूटनीति को फिर से परिभाषित करने का जीवन में एक बार मिलने वाला अविश्वसनीय अवसर है। इससे जो हासिल किया जा सकता है, वह इस सदी की सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक साझेदारी साबित हो सकती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘भारत से अधिक आवश्यक कोई साझेदार नहीं है। आने वाले महीनों और वर्षों में राजदूत के रूप में मेरा लक्ष्य एक अत्यंत महत्वाकांक्षी एजेंडे को आगे बढ़ाना है। हम इसे सच्चे रणनीतिक साझेदारों के रूप में करेंगे, जहां दोनों पक्ष अपनी ताकत, सम्मान और नेतृत्व के साथ आगे आएंगे।’’

गोर (38) ने इस बात पर जोर दिया कि ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच दोस्ती ‘‘सच्ची’’ है और यह उन ‘‘मतभेदों’’ को सुलझाने में मदद करेगी, जिनके कारण पिछले दो दशकों में संबंधों का सबसे खराब दौर देखने को मिला।

उन्होंने कहा, ‘‘सच्चे मित्रों के बीच असहमति हो सकती है, लेकिन वे अंततः अपने मतभेद सुलझा लेते हैं।’’

द्विपक्षीय संबंधों में यह गिरावट तब शुरू हुई जब ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाया, जिसमें भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी शामिल था। शुल्क के अलावा भारत-पाकिस्तान संघर्ष को मई में समाप्त कराने के ट्रंप के दावे और अमेरिका की नयी आव्रजन नीति एवं कई अन्य मुद्दों पर भी द्विपक्षीय संबंधों में गंभीर तनाव देखा गया।

गोर ने कहा, ‘‘अमेरिका और भारत केवल साझा हितों से ही नहीं जुड़े हैं बल्कि यह रिश्ता सर्वोच्च स्तरों पर आधारित है। सच्चे मित्रों में असहमति हो सकती है, लेकिन अंततः अपने मतभेद सुलझा लेते हैं।’’

अमेरिकी दूतावास के कर्मचारियों ने नये राजदूत का गर्मजोशी से स्वागत किया और जब वह दूतावास की मुख्य इमारत में दाखिल हुए, तब सैम और डेव का मशहूर गाना ‘होल्ड ऑन, आई एम कमिंग’ बज रहा था।

गोर ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर सक्रिय रूप से बातचीत कर रहे हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कुछ दिन पहले अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक ने संकेत दिया था कि वाशिंगटन इस समझौते को जल्द अंतिम रूप देने को लेकर बहुत उत्सुक नहीं है।

व्यापार पर बात करते हुए अमेरिकी राजदूत ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो की उस टिप्पणी का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने इसे ‘‘परस्परता का वर्ष’’ बताया था।

गोर ने कहा, ‘‘हम कूटनीति के मानकों को ऊंचा कर रहे हैं। इसका मतलब है निष्पक्ष व्यापार, पारस्परिक सम्मान और साझा सुरक्षा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आप में से कई लोगों ने मुझसे जारी व्यापार वार्ताओं पर जानकारी मांगी है। दोनों पक्ष सक्रिय रूप से बातचीत कर रहे हैं। वास्तव में, व्यापार पर अगली बातचीत कल होगी।’’

बहरहाल, गोर ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह बातचीत दोनों देशों के व्यापार वार्ताकारों के बीच टेलीफोन पर होगी या किसी अन्य माध्यम से।

अमेरिकी राजदूत ने कहा, ‘‘भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश है। इसलिए इसे (व्यापार वार्ता को) अंतिम चरण तक पहुंचाना आसान काम नहीं है लेकिन हम इसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘व्यापार हमारे संबंधों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन हम सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अन्य अहम क्षेत्रों में भी मिलकर काम करते रहेंगे।’’

ट्रंप के करीबी लोगों में से एक समझे जाने वाले गोर ने ‘पैक्स सिलिका’ पहल का भी उल्लेख किया, जिसे अमेरिका ने पिछले महीने शुरू किया था। जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, इजराइल और कई अन्य देश पहले ही इसमें शामिल हो चुके हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘आज मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि अगले महीने भारत को इस समूह में पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ दुनिया नयी प्रौद्योगिकी को अपना रही है, ऐसे में यह आवश्यक है कि भारत और अमेरिका इस पहल की शुरुआत से ही कंधे से कंधा मिलाकर काम करें।’’

गोर ने कहा कि वह इस ‘‘उल्लेखनीय राष्ट्र में अपने राजदूत कार्यकाल की शुरुआत गहरे सम्मान के साथ और दो महान राष्ट्रों के बीच साझेदारी को अगले स्तर पर ले जाने के स्पष्ट मिशन के साथ कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का मिलन है।’’

गोर ने कल ट्रंप के साथ हुई अपनी बातचीत का भी जिक्र किया और कहा,‘‘मैं भारत के सभी लोगों तक, विशेषकर उनके प्रिय मित्र, अद्भुत प्रधानमंत्री के लिए ट्रंप की शुभकामनाएं लेकर आया हूं।’’

राजदूत ने पिछले सप्ताह राष्ट्रपति के साथ हुई अपनी बातचीत का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा, “मैं पिछले सप्ताह राष्ट्रपति के साथ था, और नव वर्ष के तुरंत बाद रात्रिभोज के दौरान उन्होंने भारत यात्रा के अपने अविश्वसनीय अनुभव और भारत के महान प्रधानमंत्री के साथ अपनी गहरी मित्रता के बारे में बताया।”

उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि राष्ट्रपति जल्द ही, संभवतः अगले एक-दो वर्ष में, यहां आएंगे।”

गोर ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले ट्रंप के अभियान की राजनीतिक कार्रवाई समिति (पीएसी) में प्रमुख भूमिका निभाई थी और नए प्रशासन में राजनीतिक नियुक्तियों की जांच का काम सौंपे जाने के बाद उनका प्रभाव काफी बढ़ गया।

पिछले साल जनवरी में, भारत में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे ट्रंप प्रशासन के लिए अपना नया राजदूत नियुक्त करने का मार्ग प्रशस्त हो गया।

सीनेट द्वारा नियुक्ति की पुष्टि होने के कुछ दिनों बाद गोर ने पिछले साल अक्टूबर में छह दिनों के लिए भारत का दौरा किया था। इस दौरे के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की थी।

भाषा राजकुमार अविनाश

अविनाश


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