नयी दिल्ली, सात मई (भाषा) भारत ने बृहस्पतिवार को बांग्लादेश से लगभग 3,000 संदिग्ध अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की राष्ट्रीयता सत्यापन प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा।
भारत की यह टिप्पणी बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान द्वारा मंगलवार को सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट के संदर्भ में आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर भारतीय पक्ष की ओर से ऐसे किसी भी व्यक्ति को जबरन धकेला गया तो ढाका कार्रवाई करेगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘‘इन टिप्पणियों को भारत से अवैध बांग्लादेशियों की वापसी के मूल मुद्दे के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। इसके लिए बांग्लादेश के सहयोग की आवश्यकता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘बांग्लादेश के पास राष्ट्रीयता सत्यापन के 2,862 से अधिक मामले लंबित हैं, जिनमें से कुछ पांच साल से भी अधिक पुराने हैं। हमारी नीति यह है कि भारत में रह रहे सभी अवैध विदेशी नागरिकों को हमारे कानूनों, प्रक्रियाओं और स्थापित द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार स्वदेश वापस भेजा जाना चाहिए।’’
जायसवाल ने कहा, ‘‘हम बांग्लादेश से राष्ट्रीयता सत्यापन में तेजी लाने की उम्मीद करते हैं ताकि अवैध प्रवासियों की वापसी सुचारू रूप से हो सके।’’
वह रहमान की टिप्पणियों पर पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे।
जायसवाल ने तीस्ता नदी के प्रबंधन पर बांग्लादेश और चीन के बीच संभावित सहयोग से संबंधित एक अन्य प्रश्न का भी उत्तर दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत और बांग्लादेश के बीच 54 नदियाँ हैं जो दोनों देशों के बीच साझा हैं। हमने जल संबंधी सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए द्विपक्षीय तंत्र स्थापित किए हैं। ये द्विपक्षीय तंत्र नियमित अंतराल पर मिलते रहते हैं।’’
बांग्लादेश की सरकारी समाचार एजेंसी बीएसएस ने बृहस्पतिवार को कहा कि विदेश मंत्री रहमान ने चीन की अपनी यात्रा के दौरान तीस्ता नदी की जीर्णोद्धार परियोजना के लिए बीजिंग से समर्थन मांगा।
भारत ने तीस्ता नदी से संबंधित परियोजनाओं में चीन की किसी भी भागीदारी का विरोध किया है क्योंकि यह बांग्लादेश के साथ सीमा के एक संवेदनशील क्षेत्र के निकट स्थित है।
तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है, जहां यह लाखों लोगों के लिए सिंचाई और आजीविका का एक प्रमुख स्रोत है।
भाषा
नेत्रपाल अविनाश
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