Indian Financial History/ Image Credit: IBC24 News
Indian Financial History: नई दिल्ली: सोना आम आदमी से लेकर बड़े लोगों तक हर किसी के काम आता है। आम लोगों से लेकर सरकार तक, मुश्किल समय में सोने ने कई बार सहारा दिया है। इतिहास गवाह है कि कई मौकों पर यही सोना देश की अर्थव्यवस्था और सरकारों के लिए बड़ी परेशानी भी बन गया। आजादी के बाद से अब तक कई बार सरकार को सोने से जुड़े फैसलों के कारण आर्थिक दबाव और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है।
भारत-चीन युद्ध के दौरान भारत गंभीर विदेशी मुद्रा संकट से जूझ रहा था। उस समय के वित्त मंत्री मोरारजी देसाई को लगा कि भारतीय घरों में पड़ा सोना देश की अर्थव्यवस्था में उपयोग नहीं हो रहा है। इसी के बाद सरकार ने ‘गोल्ड कंट्रोल एक्ट’ लागू किया, जिसके तहत 14 कैरेट से अधिक शुद्धता वाले गहनों के निर्माण पर रोक लगा दी गई। (Indian Financial History) सरकार का उद्देश्य सोने की खपत और तस्करी पर रोक लगाना था, लेकिन इसका उल्टा असर हुआ और देश में ब्लैक मार्केट और सोने की तस्करी तेजी से बढ़ गई।
Indian Financial History: साल 1991 भारत के आर्थिक इतिहास का सबसे संकटपूर्ण दौर माना जाता है। विदेशी मुद्रा भंडार इतना कम हो गया था कि देश के पास केवल दो सप्ताह के आयात के लिए धन बचा था। स्थिति संभालने के लिए भारत सरकार ने 47 टन सोना Bank of England और स्विट्जरलैंड के बैंकों के पास गिरवी रखा। उस समय मुंबई एयरपोर्ट से सोने के बक्से विदेश भेजे जाने की तस्वीरों ने देशभर में राजनीतिक और आर्थिक बहस छेड़ दी थी। हालांकि, इसी संकट ने बाद में आर्थिक उदारीकरण की राह भी खोली।
साल 2013 में रुपये में भारी गिरावट और बढ़ते करेंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) ने सरकार की चिंता बढ़ा दी थी। इसकी एक बड़ी वजह कच्चे तेल के बाद सोने का बढ़ता आयात था। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने सोने पर आयात शुल्क बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया और ‘80:20 स्कीम’ लागू की। (Indian Financial History) इस योजना के तहत आयात किए गए 100 किलो सोने में से 20 प्रतिशत दोबारा निर्यात करना अनिवार्य था। हालांकि, बाद में तस्करी बढ़ने की खबरों के चलते इस योजना को समाप्त कर दिया गया।
Indian Financial History: मोदी सरकार ने साल 2015 में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) योजना शुरू की थी। इसका मकसद लोगों को फिजिकल गोल्ड की बजाय पेपर गोल्ड में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना था, ताकि देश में सोने का आयात कम हो सके। लेकिन बीते कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के कारण सरकार पर बड़ा वित्तीय बोझ पड़ने लगा। सरकार को निवेशकों को 2.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के साथ-साथ मैच्योरिटी पर बढ़ी हुई कीमत भी चुकानी पड़ रही थी। इसी वजह से सरकार ने नई SGB सीरीज जारी करने पर रोक लगा दी।
वैश्विक तनाव और युद्ध जैसे हालात में लोग सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर भागते हैं। लेकिन भारत में बड़ी मात्रा में खरीदा गया सोना लॉकरों में बंद रहता है, जिससे वह पैसा आर्थिक गतिविधियों में शामिल नहीं हो पाता। सरकार चाहती है कि लोग अपना पैसा सोने में फंसाने के बजाय शेयर बाजार, उद्योग और विकास कार्यों में निवेश करें, (Indian Financial History) ताकि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम हो सके।
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