भारत में आर्थिक प्रगति के साथ-साथ पीएम 2.5 प्रदूषण भी बढ़ा, मृतकों की संख्या में हुआ इजाफा: अध्ययन

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भारत में आर्थिक प्रगति के साथ-साथ पीएम 2.5 प्रदूषण भी बढ़ा, मृतकों की संख्या में हुआ इजाफा: अध्ययन

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  • Publish Date - September 28, 2026 / 06:37 PM IST,
    Updated On - September 28, 2026 / 06:37 PM IST

नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) नए अध्ययन के अनुसार वर्ष 2000 के बाद भारत की तेज आर्थिक प्रगति के कारण बिजली की मांग में करीब चार गुना बढ़ोतरी हुई और इस मांग का तीन-चौथाई से अधिक हिस्सा कोयले से पूरा किया गया, जिसके कारण हवा में पीएम2.5 प्रदूषण का स्तर बढ़ा और 2000 से 2020 के बीच शहरों में प्रदूषण के कारण जान गंवाने वालों की संख्या में वृद्धि हुई।

ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में कहा गया कि तेज आर्थिक प्रगति से भारत में बिजली की आपूर्ति और स्वच्छ ईंधन से खाना पकाने की सुविधा में बड़ा सुधार हुआ, लेकिन कोयले से बनने वाली बिजली पर बढ़ती निर्भरता ने बाहरी वायु प्रदूषण बढ़ाया और शहरों में वायु प्रदूषण से जुड़ी मौतों में वृद्धि हुई।

‘नेचर सिटीज जर्नल’ में प्रकाशित इस अध्ययन के निष्कर्षों में कहा गया कि भारत के आर्थिक और ऊर्जा परिदृष्य में बदलाव का सार्वजनिक स्वास्थ्य पर मिला-जुला असर हुआ है।

अध्ययन के मुताबिक, एक ओर घरों के अंदर प्रदूषण से जुड़े जोखिम कम हुए, वहीं दूसरी ओर बाहर हवा में प्रदूषण बढ़ा।

अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के बासुदेव स्वैन ने कहा, ‘चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि इन सुधारों में मददगार साबित हुई बिजली का उत्पादन अधिक स्वच्छ तरीके से हो।’

शोधकर्ताओं ने उपग्रहों से मिले आंकड़ों, वायुमंडलीय विश्लेषण, रासायनिक परिवहन मॉडलिंग, सामाजिक-आर्थिक और ऊर्जा आंकड़ों तथा जनसंख्या और मृत्यु दर के आंकड़ों को मिलाकर अध्ययन किया।

शोधकर्ताओं के अनुसार, 2000 से 2020 के बीच भारत में प्रति व्यक्ति जीडीपी करीब 600-700 अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2,000 डॉलर से अधिक हो गई, जबकि बिजली की मांग लगभग 450 टेरावाट-घंटे (टीडब्ल्यूएच) से बढ़कर करीब 2,000 टीडब्ल्यूएच हो गई।

प्रति व्यक्ति जीडीपी में 1 प्रतिशत की वृद्धि के बाद बिजली की मांग में करीब 1.14 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।

शोधकर्ताओं ने कहा कि इस वृद्धि के साथ भारत में कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों की संख्या में भी काफी बढ़ोतरी हुई। वर्ष 2000 से पहले 71 संयंत्र चालू किए गए थे, जबकि 2001 से 2024 के बीच 182 और संयंत्र शुरू किए गए।

अध्ययन में अनुमान लगाया गया कि पीएम2.5 के संपर्क में आने से शहरों में साल 2000 में करीब 6.70 लाख लोगों की मौत हुई थी, जबकि साल 2020 में यह आंकड़ा बढकर 8.70 लाख हो गया, यानी इनमें करीब 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

भाषा जोहेब दिलीप

दिलीप