नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से कहा कि वे सातवीं कक्षा के छात्रों को त्रि-भाषा नियम से दी गई छूट को छठी कक्षा के मौजूदा छात्रों पर लागू करने पर विचार करें।
न्यायालय ने सीबीएसई को 17 सितंबर को कहा था कि वह 2027 से शुरू होने वाले अगले अकादमिक सत्र से छठी कक्षा के छात्रों के लिए तीन भाषाओं, जिनमें दो भारतीय भाषाएं शामिल हों, का अध्ययन करने की अपनी नीति लागू करने पर विचार करे।
सीबीएसई के 29 जून के बयान के अनुसार, अभी कक्षा 7, 8 और 9 में पढ़ रहे छात्रों को 10वीं कक्षा में जाने पर तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने केंद्र और सीबीएसई की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि वे इस साल छठी कक्षा के छात्रों को भी वही छूट दें, जो कक्षा 7, 8 और 9 के छात्रों को दी गई है।
पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘सॉलिसिटर जनरल ने बताया है कि लगभग 99 प्रतिशत स्कूलों ने तीसरी भाषा नीति को अपनाया है और उन्हें आवश्यक सुविधाएं प्रदान की गई हैं, जबकि केवल 1.2 प्रतिशत स्कूलों ने ऐसा नहीं किया है। इस बात को ध्यान में रखते हुए, हम निर्देश देते हैं कि छठी कक्षा के छात्रों को भी सातवीं के छात्रों की तरह ही छूट दी जाए।’’
न्यायालय ने याचिकाओं की सुनवाई को छह हफ्ते बाद के लिए निर्धारित करते हुए सीबीएसई से कहा कि वह चार हफ्ते के अंदर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करे और जवाब दाखिल होने के दो हफ्ते के भीतर अपना प्रत्युत्तर भी दाखिल करे।
सीबीएसई ने अपने बयान में कहा था कि सातवीं और आठवीं कक्षाओं के मौजूदा बैच के जिन छात्रों ने पहले ही दो गैर-भारतीय भाषाएं चुन ली हैं और उनकी पढ़ाई शुरू कर दी है, उन्हें एक अतिरिक्त भारतीय भाषा का भी अध्ययन करना होगा और 10वीं कक्षा के मूल्यांकन तक उसे जारी रखना होगा।
सीबीएसई ने कहा था, ‘‘तीसरी भाषा का मूल्यांकन स्कूल द्वारा केवल आंतरिक स्कूल-आधारित मूल्यांकन के जरिए किया जाएगा। जब ये बैच 10वीं कक्षा में पहुंचेंगे, तो इस तीसरी भाषा के लिए कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।’’
सोमवार को न्यायालय ने एक आदेश में सीबीएसई से कहा कि वह इस साल छठी कक्षा के छात्रों को भी वही लाभ प्रदान करे।
हालांकि, सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने दलील दी वह मौजूदा छठी कक्षा के बैच को इस नीति से छूट देने के पक्ष में नहीं है और छात्रों को इसी अकादमिक वर्ष से भाषा संबंधी नये प्रारूप को अपनाना चाहिए।
सॉलिसिटर जनरल ने पीठ को बताया कि ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि लागू करने से जुड़ी दिक्कतों का असर सीबीएसई से संबद्ध सिर्फ 1.2 प्रतिशत स्कूलों पर ही पड़ा।
केंद्र के अनुसार, लगभग 99 प्रतिशत स्कूलों ने त्रि-भाषा नीति अपना ली और उनके पास जरूरी सुविधाएं मौजूद थीं।
न्यायमूर्ति बागची ने सुझाव दिया कि जो छात्र अभी छठी कक्षा में हैं, उनके लिए इसे लागू करने में देरी की जा सकती है, ताकि सीबीएसई को जरूरी अवसंरचना तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय मिल सके।
हालांकि, सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी कि सरकार मौजूदा शैक्षणिक वर्ष में छठी कक्षा के छात्रों को छूट देने के पक्ष में नहीं है।
प्रधान न्यायाधीश ने सुझाव दिया कि वरिष्ठ अधिकारियों की एक कमेटी सीधे उन स्कूलों और याचिकाकर्ताओं से संपर्क कर सकती है, जिन्हें इसे लागू करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था।
उन्होंने कहा, ‘‘आप एक काम क्यों नहीं करते? बहुत जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों की एक कमिटी बनाइए।’’
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने एक और कमेटी बनाने के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि इस मामले में स्पष्ट फैसले की जरूरत है।
शंकरनारायणन ने दलील दी कि चुनौती सिर्फ तीसरी भाषा को शामिल करने के बारे में नहीं है, बल्कि उन छात्रों के लिए भाषा के विकल्प बदलने की है, जो स्कूल में कई साल की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं।
उन्होंने याचिकाकर्ता स्कूल, दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) का उदाहरण दिया, जहां चौथी कक्षा से स्पेनिश पढ़ रहे छात्रों को नये ढांचे के तहत संस्कृत का अध्ययन करने के लिए कहा गया।
भाषा
सुभाष दिलीप
दिलीप