ईरान संकट : ‘पीटीआई फैक्ट चैक’ की पड़ताल में 14 सोशल मीडिया पोस्ट फर्जी पाई गईं

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ईरान संकट : ‘पीटीआई फैक्ट चैक’ की पड़ताल में 14 सोशल मीडिया पोस्ट फर्जी पाई गईं

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  • Publish Date - March 3, 2026 / 08:13 PM IST,
    Updated On - March 3, 2026 / 08:13 PM IST

नयी दिल्ली, तीन मार्च (भाषा) अमेरिका और इजराइल के ईरान पर संयुक्त हमले के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के साथ ही सोशल मीडिया मंचों पर गलत सूचनाओं में वृद्धि देखी गई है। ‘प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया’ (पीटीआई) की फैक्ट चेक इकाई ने अपनी पड़ताल में ऐसे 14 वायरल वीडियो को फर्जी दावे वाला पाया, जिन्हें ईरान युद्ध से जोड़ा गया था।

शनिवार को ईरान पर हमले की खबरें सामने आने के बाद से, विस्फोटों, मिसाइल हमलों, ढहती इमारतों और आपातकालीन बचाव कार्यों को दर्शाने वाले सनसनीखेज वीडियो और तस्वीरें व्यापक रूप से ऑनलाइन प्रसारित हो रही हैं। इनमें से कई पोस्ट सत्यापन से पहले ही लाखों बार देखे जा चुके हैं।

‘पीटीआई फैक्ट चेक’ द्वारा जांचे और खंडन किए गए प्रमुख फर्जी दावों में निम्नलिखित शामिल हैं :

– कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से निर्मित एक वीडियो में दुबई पर ईरानी हमले का झूठा दावा किया गया, जिसे किसी भी वास्तविक घटना से कोई संबंध नहीं होने के बावजूद फेसबुक पर 20 करोड़ से अधिक बार देखा गया और 19 लाख लाइक मिले।

– एआई निर्मित एक क्लिप में अमेरिकी सैनिक को अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर कथित ईरानी हमलों को लेकर भावुक होते हुए दिखाया गया था, जिसे बाद में मनगढ़ंत सामग्री के रूप में पहचाना गया।

– ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का फरवरी में दिया गया एक पुराना भाषण, हमलों के बाद उनकी मृत्यु की खबरों का खंडन करने वाले एक नए संबोधन के रूप में प्रसारित किया गया।

– जून 2025 की एक तस्वीर को फर्जी दावे के साथ ईरान पर इजराइल-अमेरिका के ताजा हमले के रूप में प्रस्तुत किया गया था।

– जुलाई 2025 में सीरिया से आए एक हवाई हमले के वीडियो को गलत तरीके से हाइफा पर ईरानी हमले के फुटेज के रूप में साझा किया गया।

– अक्टूबर 2024 में प्रसारित एक आगजनी के वीडियो को तेल अवीव पर ईरानी हमले के दृश्यों के रूप में पेश किया गया।

– जुलाई 2024 में यमन के एक बंदरगाह पर हुए विस्फोट को सऊदी अरब पर हुए हालिया हमले से गलत तरीके से जोड़ दिया गया।

प्रत्येक मामले में, पीटीआई फैक्ट चेक ने रिवर्स इमेज सर्च, मेटाडेटा विश्लेषण और विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय समाचार संगठनों की सत्यापित रिपोर्ट से तुलना करके फुटेज के मूल स्रोत का पता लगाया।

कई वीडियो या तो पिछली घटनाओं से लिए गए थे या एआई उपकरणों का उपयोग करके बनाए गए थे।

भाषा शफीक दिलीप

दिलीप