भर्ती में अनियमितता: न्यायालय ने पूर्व सीजीपीएससी सचिव की जमानत याचिका पर सीबीआई से जवाब मांगा

Ads

भर्ती में अनियमितता: न्यायालय ने पूर्व सीजीपीएससी सचिव की जमानत याचिका पर सीबीआई से जवाब मांगा

  •  
  • Publish Date - September 21, 2026 / 04:38 PM IST,
    Updated On - September 21, 2026 / 04:38 PM IST

नयी दिल्ली, 21 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने 2020 से 2022 के दौरान भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) के पूर्व सचिव की ओर से दायर जमानत याचिका पर सोमवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जवाब मांगा।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ जीवन किशोर ध्रुव की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। ध्रुव ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के पांच अगस्त के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें इस मामले में उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।

सीबीआई ने ध्रुव को पिछले साल सितंबर में गिरफ्तार किया था। कथित अनियमितताओं के समय वह सीजीपीएससी के सचिव पद पर कार्यरत थे।

उच्च न्यायालय ने जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक कराने में मदद करने वाले लोग लाखों युवा अभ्यर्थियों के करियर और भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हैं तथा ऐसा कृत्य हत्या से भी ‘‘अधिक जघन्य’’ है।

सोमवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई और सीबीआई को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब मांगा।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता इसके एक सप्ताह बाद जवाबी हलफनामा दाखिल कर सकता है। मामले को चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार सीजीपीएससी ने 2020 से 2022 के दौरान राज्य सेवा परीक्षा आयोजित की थी। आरोप है कि उस अवधि में याचिकाकर्ता आयोग के सचिव पद पर तैनात थे और आयोग की ओर से आयोजित परीक्षाओं की गोपनीयता बनाए रखना उनकी आधिकारिक जिम्मेदारी थी।

अभियोजन पक्ष का आरोप है कि याचिकाकर्ता ने अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर गोपनीयता का उल्लंघन किया और अपने बेटों को प्रश्न-पत्र उपलब्ध कराए।

यह भी आरोप है कि इसी आधार पर उनके एक बेटे का चयन उप जिलाधिकारी के पद पर हुआ। उनका बेटा भी इस मामले में आरोपी है।

ध्रुव ने इस मामले में जमानत के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया था। उनके वकील ने उच्च न्यायालय में दलील दी थी कि केवल आयोग के सचिव पद पर होने के कारण उन्हें गलत तरीके से मामले में फंसाया गया है।

उनके वकील ने यह भी दलील दी थी कि वह कथित प्रश्नपत्र लीक में न तो शामिल थे और न ही ऐसा कोई सबूत है जो कथित अपराधों में उनकी भागीदारी को साबित करे।

ध्रुव के अलावा आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष तमन सिंह सोनवानी समेत कई अन्य लोग भी इस मामले में आरोपी हैं।

भाषा सुरभि वैभव

वैभव