Vande Bharat/Image Credit: IBC24.in
Vande Bharat: नई दिल्ली: रविवार की सुबह जब लोग गहरी नींद से जागे तो एक खबर ने सबको चौका दिया। अमेरिका और इजराइल के संयुक्त सैन्य अभियान में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। युद्ध शनिवार को ही शुरू हुआ था जिसके 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि, अमेरिका को इतनी बड़ी कामयाबी मिली। (Vande Bharat) खामेनेई की मौत के चलते ईरान ने 40 दिन के शोक का ऐलान किया है। इसी के साथ युद्ध में अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर बड़ी मनोवैज्ञानिक बढ़त बना ली है।
अमेरिका और इजराइल की एयर स्ट्राक ने ईरान के सार्वेच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को मौत की नींद सुला दिया। ये हमला सुबह स्थानीय समय के मुताबिक 8 बजकर 15 मिनट पर हुआ जब खामनेई अपने टॉप लीडर्स और मिलिट्री अफसरों के साथ “रक्षा परिषद की बैठक” में अमेरिका और ईरान की घेराबंदी के खिलाफ रणनीति बना रहे थे। रात की बजाय उजाले में किए इस हमले ने ईरानियों को चकित कर दिया। ईरान के सरकारी टीवी चैनल पर एंकर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर ब्रेक करते समय फूट-फूटकर रो पड़े।
हमले में सिर्फ खामनेई ही नहीं मारे गए बल्कि उनकी बेटी, दामाद, बहू, पोता-पोती की भी मौत हो गई। इसके साथ ही टॉप सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों की भी मौत हो गई। जिसमें ईरान के रक्षा मंत्री अजीज नासिरजादेह, खामेनेई के वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार अली शमखानी, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के ग्राउंड फोर्स कमांडर जनरल मोहम्मद पाकपुर, (Vande Bharat) ईरानी सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल अब्दुल रहीम मौसवी, खामेनेई के सैन्य कार्यालय के प्रमुख मोहम्मद शिराजी शामिल है।
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ छेड़े गए युद्ध को “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” और इजरायल ने इसे “रोरिंग लायन” यानी दहाड़ता हुआ शेर कोडनेम दिया। खामनेई को मारने के लिए दोनों ने अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया। जिसमें लेजर-गाइडेड बम GBU-28, तोमाहोक क्रूज मिसाइले और बंकर बस्टर बम शामिल थे। इस ऑपरेशन में F-35, F-22 रैप्टर और B-2 स्पिरिट जैसे स्टील्थ विमानों ने हिस्सा लिया। खामनेई की मौत पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेजामिन नेतयाहू ने खुशी जताई। ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, इतिहास के सबसे बुरे लोगों में से एक, खामेनेई की मौत हो गई है। वह हमारे इंटेलिजेंस और बहुत एडवांस्ड ट्रैकिंग सिस्टम से बच नहीं पाया और इज़राइल के साथ मिलकर काम करते हुए, वो या उसके साथ मारे गए दूसरे नेता कुछ भी नहीं कर सके। (Vande Bharat) ईरानी लोगों के लिए अपना देश वापस लेने का यह सबसे बड़ा मौका है।
गाजा में इजराइल और हमास के बीच जारी युद्ध अभी खत्म ही हुआ था और मिडिल ईस्ट में शांति पूरी तरह लौटी भी नहीं थी कि मिडिल ईस्ट फिर से युद्ध की आग में जलने लगा है। दुनिया में इस युद्ध के दूरगामी परिणाम होंगे। जिस पर सबकी नजर रहेगी।
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