इजराइली मतपत्रों से ऐसे नेताओं को चुनना चाहते हैं, जो फलस्तीनियों पर गोलियों से शासन करें: राजदूत

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इजराइली मतपत्रों से ऐसे नेताओं को चुनना चाहते हैं, जो फलस्तीनियों पर गोलियों से शासन करें: राजदूत

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  • Publish Date - August 19, 2026 / 09:27 PM IST,
    Updated On - August 19, 2026 / 09:27 PM IST

नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) इजराइल के संसदीय चुनाव से पहले एक बार फिर फलस्तीनी लोगों को उस देश की घरेलू राजनीति की ‘कीमत चुकाने’ के लिए मजबूर किया जा रहा है। भारत में फलस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला एम. अबू शावेश ने बुधवार को यह कहा।

उन्होंने आरोप लगाया कि इज़राइली लोग मतपत्रों के ज़रिए ऐसे नेताओं को चुनना चाहते हैं जो ‘गोलियों के दम पर हम पर शासन करें’।

उन्होंने यहां फलस्तीनी दूतावास में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘फलस्तीनी भूमि कोई चुनावी पुरस्कार नहीं है। फलस्तीनी लोगों की जिंदगी चुनाव प्रचार की मुद्रा नहीं है। फलस्तीनियों के अधिकार इजराइली चुनाव में गिने जाने वाले मतपत्र नहीं हैं।’ उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘हम इस चुनाव पर नजर रख रहे हैं।’

शावेश ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से 2026 की शुरुआत में घोषित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को गाजा में ‘‘संघर्ष’’ के समाधान की दिशा में एक कदम बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यह गाजा में दीर्घकालिक शांति स्थापित करने की पहल नहीं है।

विदेश मंत्रालय में सचिव (सीपीवी एवं ओआईए) श्रीप्रिया रंगनाथन की फलस्तीन यात्रा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्होंने फलस्तीनी प्रधानमंत्री मोहम्मद मुस्तफा से मुलाकात की है।

रामल्ला स्थित फलस्तीन में भारत के प्रतिनिधि कार्यालय (आरओआई) ने भी सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि चर्चा भारत-फलस्तीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे साझेदारी संबंधों को और मजबूत करने तथा आपसी हितों के प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर केंद्रित रही।

रंगनाथन ने रामल्ला में फलस्तीन के विदेश मामलों एवं प्रवासी मामलों के मंत्री वरसेन अघाबेकियन शाहिन और कई वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात की।

शावेश ने संवाददाताओं से कहा, ‘कल से फलस्तीन में एक उच्चस्तरीय राजनयिक दल मौजूद है… भारत तीन प्रमुख परियोजनाएं स्थापित करने जा रहा है और इनमें पहली परियोजना एक अस्पताल की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2017 में अपनी फलस्तीन यात्रा के दौरान इसकी घोषणा की थी। हम अब उस परियोजना के क्रियान्वयन की शुरुआत करने जा रहे हैं और कल हमने अंतिम दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए हैं।’

उन्होंने कहा कि दूसरी परियोजना व्यावसायिक प्रशिक्षण से संबंधित है और इसके लिए फलस्तीन में एक केंद्र स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘हम इसके बहुत करीब हैं।’

रंगनाथन 16 से 21 अगस्त तक मिस्र, फलस्तीन और लेबनान की आधिकारिक यात्रा पर हैं।

रामल्ला स्थित भारत के प्रतिनिधि कार्यालय ने बताया कि रंगनाथन ने फलस्तीन के स्वास्थ्य मंत्री माजिद अबू रमजान से भी मुलाकात की और फलस्तीनी स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत के सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की।

फलस्तीनी राजदूत ने इजराइल पर ‘चरमपंथी इजराइली बाशिंदों’ को छूट देने का आरोप लगाया, जो कथित तौर पर फलस्तीनियों को डरा-धमकाकर और परेशान करके उन्हें उनकी प्राचीन मातृभूमि से बेदखल करने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इजराइल में संसदीय चुनाव से 69 दिन पहले, फलस्तीनी लोगों को एक बार फिर इजराइल की घरेलू राजनीति की ‘कीमत चुकानी’ पड़ रही है।

यह पूछे जाने पर कि क्या इजराइल में होने वाले चुनाव पर फलस्तीन करीबी नजर रख रहा है, शावेश ने कहा, ‘हां… हम चुनाव पर नजर रख रहे हैं।’

उन्होंने कहा कि फलस्तीन की मुख्य रणनीति अपनी मातृभूमि के लिए संघर्ष करना है और ‘हम अपनी मातृभूमि नहीं छोड़ेंगे। हम अपना हर प्रयास करेंगे।’

इजराइली चुनाव पर उन्होंने आरोप लगाया कि दुर्भाग्य से बार-बार फलस्तीनी लोग ‘कट्टरपंथी लोगों की वजह से कीमत चुका रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि इजराइली नेता मतपत्रों के जरिये सत्ता में लौटना चाहते हैं और ‘गोलियों से हम पर शासन करना चाहते हैं।’

भाषा

शुभम अविनाश

अविनाश

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