नयी दिल्ली, सात जनवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने आईटीबीपी भर्ती से जुड़ी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने के मामले में ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइकोमेट्री’ (आईआईपी) के दो निदेशकों को जमानत दे दी है।
अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी ने आगे और पूछताछ करने का अनुरोध नहीं किया है, इसलिए आरोपियों को हिरासत में रखने से कोई लाभ नहीं होगा।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नूपुर गुप्ता ने शुभेंदु कुमार पॉल और जयदीप गोस्वामी को 50,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी।
अदालत ने कहा कि आरोपपत्र दाखिल हो चुका है और जांच अधिकारी (आईओ) ने तीन महीने से अधिक की हिरासत के बाद आरोपियों से आगे की पूछताछ करने का अनुरोध नहीं किया है, इसलिए अदालत ने आवेदकों के पक्ष में फैसला सुनाया।
पांच जनवरी के एक आदेश में अदालत ने कहा, ‘‘चूंकि मुकदमे में समय लगने की संभावना है और आरोपियों से आगे की पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं है, इसलिए आवेदकों को जेल में रखने से कोई लाभ नहीं होगा। इसी को ध्यान में रखते हुए, जमानत याचिका स्वीकार की जाती है।’’
दोनों आरोपियों को सुनवाई की प्रत्येक तारीख पर अदालत के समक्ष पेश होने, सबूतों के साथ छेड़छाड़ ना करने या गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास ना करने और अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश ना छोड़ने का निर्देश दिया गया है। इस मामले में आरोपी धर्मेंद्र को 23 दिसंबर, 2025 को जमानत मिल गई थी।
दिल्ली पुलिस ने सितंबर 2025 में प्रश्नपत्र लीक मामले में आईआईपी के तीन निदेशकों – गोस्वामी, पॉल और अमिताभ रॉय को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने एक सलाहकार रोहित राज और एक प्रिंटर धर्मेंद्र को भी गिरफ्तार किया गया था।
पुलिस ने इसके पहले एक बयान में कहा था कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के कमांडेंट कुशल कुमार द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार कांस्टेबल (ट्रेड्समैन) के पद पर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा आयोजित करने का ठेका निविदाओं के माध्यम से आईआईपी को दिया गया था।
एजेंसी प्रश्न पत्र तैयार करने और छापने, ओएमआर शीट डिजाइन करने और स्कैन करने, उनकी सुरक्षित ढुलाई सुनिश्चित करने और गोपनीयता बनाए रखने के लिए जिम्मेदार थी।
परीक्षा 10 जनवरी, 2021 को 13 शहरों के 81 केंद्रों पर 46,174 उम्मीदवारों के लिए आयोजित की गई थी। हालांकि, परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रश्न पत्र व्हाट्सएप पर लीक हो गया था।
कथित प्रश्नपत्र लीक मामले में आईआईपी की संलिप्तता की पुलिस जांच के दौरान, एक कर्मचारी ने खुलासा किया कि निदेशक इस उल्लंघन के लिए जिम्मेदार थे और उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया के कुछ हिस्सों को ‘आउटसोर्स’ किया था।
आईआईपी के तीनों निदेशकों को 19 सितंबर, 2025 को कोलकाता से गिरफ्तार किया गया और सियालदह की एक अदालत में पेश किया गया, जिसने उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली भेज दिया।
पूछताछ के दौरान आईआईपी निदेशकों ने इस गिरोह में एक सलाहकार और एक प्रिंटर की संलिप्तता का खुलासा किया, जिसके परिणामस्वरूप राज और धर्मेंद्र को गिरफ्तार किया गया।
भाषा संतोष रंजन
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