नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने बुधवार को 2025 बैच के अर्हता प्राप्त नए ‘एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड’ (एओआर) से कहा कि वे ऑनलाइन लोकप्रियता के पीछे भागने के बजाय अपने पेशे में कड़ी मेहनत करें।
प्रधान न्ययाधीश ने कहा कि ‘दिखना’ और ‘विश्वसनीयता’ एक ही चीज नहीं हैं।
‘सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन’ द्वारा अर्हता हासिल करने वाले नए एओआर के लिए आयोजित सम्मान समारोह में प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि एओआर के तौर पर अर्हता हसिल करना न केवल पेशेवर उपलब्धि है, बल्कि जिम्मेदारी का दायरा बढ़ना भी है।
एओआर एक खास योग्यता हासिल करने वाला वकील होता है जिसे उच्चतम न्यायालय ने मुवक्किल की ओर से शीर्ष अदालत में पैरवी करने और काम करने के लिए अधिकृत किया होता है। केवल एओआर ही शीर्ष अदालत में मुवक्किल की ओर से पेशी दर्ज करा सकते हैं, याचिका या दस्तावेज दाखिल कर सकते हैं, जिससे प्रक्रिया का पालन और उच्च-स्तरीय प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होता है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘पदवी शायद दरवाजा खोल दे, लेकिन करियर नहीं बनाती। करियर आपके काम की गुणवत्ता से बनता है। इसलिए मेरी सलाह है कि आप इस बात की चिंता न करें कि लोग कितनी जल्दी आपका नाम पहचानते हैं, इसके बजाय यह सुनिश्चित करें कि जब भी किसी केस फाइल पर आपका नाम दिखे, तो पीठ को पता हो जाए कि उसका सामना एक बहुत अच्छी तरह से तैयारी करने वाले वकील और पेपरबुक से होगा।’
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ऑनलाइन लोकप्रियता से सफलता को मापने के लालच से बचें। आपको किसी टीवी चैनल की तरह काम नहीं करना है जिसे टीआरपी की चिंता हो।’’
उन्होंने एओआर से कहा कि असल मायने में वही सम्मान अहम है जिसे वे अदालत कक्ष के अंदर और अपने साथियों और बार के बीच कमाते हैं।
भाषा संतोष रंजन
रंजन