प्रयागराज, 19 मार्च (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि 22 जून को एटा में पानी की टंकी के निर्माण के लिए खुदाई के दौरान निकली जैन प्रतिमा को सुरक्षा और अध्ययन के लिए प्रयागराज में स्थित इलाहाबाद संग्रहालय में रखा जाए।
यह प्रतिमा नौवीं से 10वीं शताब्दी का माना जाता है और इस पर जैन समुदाय के दिगंबर और श्वेतांबर संप्रदायों द्वारा दावा किया जा रहा है। न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की पीठ ने व्यवस्था दी कि प्रतिमा स्थानांतरित होने पर संग्रहालय इसे लोगों के लिए प्रदर्शित करेगा।
अदालत ने साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के साथ समन्वय में विशेषज्ञों की एक टीम गठित करने का निर्देश दिया जिससे इस प्रतिमा की प्रकृति, काल और सांप्रदायिक संबद्धता निर्धारित करने के लिए एक विस्तृत अध्ययन किया जा सके।
अदालत ने 17 मार्च को दिए अपने आदेश में कहा, ‘‘इस प्रतिमा के ऐतिहासिक महत्व पर विचार करते हुए हम इसे प्रयागराज स्थित केंद्रीय संग्रहालय में सुरक्षित रखने का निर्देश देते हैं और एटा के जिलाधिकारी को इसे किसी भी स्थिति में 11 अप्रैल, 2026 तक प्रयागराज स्थित संग्रहालय के प्रभारी को सौंपने का निर्देश देते हैं।’’
अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि विशेषज्ञ समिति इस प्रतिमा को संग्रहालय में रखने के तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का प्रयास करेगी।
भाषा सं राजेंद्र सुरभि
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