जयराम रमेश ने ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ के संरक्षण कार्यक्रम की शुरुआत से जुड़े घटनाक्रम को याद किया

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जयराम रमेश ने ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ के संरक्षण कार्यक्रम की शुरुआत से जुड़े घटनाक्रम को याद किया

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  • Publish Date - June 21, 2026 / 11:38 AM IST,
    Updated On - June 21, 2026 / 11:38 AM IST

दिल्ली, 21 जून (भाषा) पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने रविवार को याद किया कि लगभग 50 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एक अख़बार के पहले पन्ने पर ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ की तस्वीर देखी थी, जो लगभग विलुप्त होने की कगार पर था, इसके बाद एक क्रमिक घटनाक्रम ने इस पक्षी के संरक्षण कार्यक्रम की शुरुआत को प्रेरित किया।

रमेश ने याद किया कि आज से 50 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी हल्दीघाटी युद्ध के 400 वर्ष पूरा होने के अवसर पर वहां गईं थी।

गांधी ने वहां एक विशाल जनसभा को भी संबोधित किया था।

रमेश ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘ उदयपुर जाने वाली सुबह की उड़ान में उन्होंने संयोग से ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ का उस दिन का संस्करण देखा। पहले पन्ने पर ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ की तस्वीर छपी थी जो लगभग विलुप्त होने की कगार पर था। उन्होंने अख़बार के चौथे पन्ने पर छपी एक खबर भी पढ़ी।’’

उन्होंने यह बात साझा करते हुए 50 साल पुराने अख़बार के पहले पन्ने की तस्वीर भी पोस्ट की।

जयराम रमेश ने कहा, ‘‘उदयपुर पहुंचने पर उन्होंने पक्षी प्रेमियों के एक समूह से मुलाकात की, जिसका नेतृत्व हर्ष वर्धन कर रहे थे और वह उस समय राजस्थान वन्यजीव बोर्ड के सदस्य थे।’’

कांग्रेस नेता ने याद किया कि इस घटनाक्रम की श्रृंखला ने ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ के संरक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की, साथ ही जैसलमेर और बाड़मेर के पास विशाल ‘डेजर्ट नेशनल पार्क’ की स्थापना के लिए भी कदम उठाए गए।

उन्होंने कहा कि ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ अब भी संकट में है और कई खतरों का सामना कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन 21 जून 1976 को उदयपुर की उस उड़ान के बाद से उम्मीदें बनी हुई हैं। वास्तव में 1961 में प्रसिद्ध पक्षी विज्ञानी सलीम अली ने इसे राष्ट्रीय पक्षी बनाने का भी प्रस्ताव दिया था।’’

रमेश ने कहा कि हालांकि, दो साल बाद भारतीय वन्यजीव बोर्ड ने ऐतिहासिक, पौराणिक, सांस्कृतिक और धार्मिक कारणों को आधार बनाते हुए ‘मोर’ को राष्ट्रीय पक्षी के रूप में चुना।

उन्होंने बताया कि इस बोर्ड की अध्यक्षता मैसूर के तत्कालीन महाराजा जयचामराजेंद्र वाडियार कर रहे थे ।

भाषा शोभना रंजन

रंजन