लखनऊ, 21 जून (भाषा) उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि योग नकारात्मकता से रचनात्मकता और प्रमाद से प्रसाद की अवस्था तक पहुंचाने का माध्यम है।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जन भवन में आयोजित कार्यक्रम में मातृशक्ति के साथ सामूहिक योगाभ्यास करते हुए उन्होंने कहा कि योग को केवल एक दिवस तक सीमित न रखकर जीवनशैली और संस्कार के रूप में अपनाया जाना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि योग भारत की सनातन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जो बाल्यावस्था से वृद्धावस्था तक स्वस्थ, समर्थ और विकसित जीवन का मार्ग दिखाती है।
उन्होंने कहा, ‘‘जहां योग है वहां स्वास्थ्य है, जहां स्वास्थ्य है वहां प्रसन्नता है और वहीं जीवन की सच्ची समृद्धि है। योग हमें तनाव से ताकत, निराशा से आशा और सामान्य जीवन से श्रेष्ठ जीवन की ओर ले जाता है।’’
उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में योग का दायरा विश्वभर में तेजी से बढ़ा है और आज करोड़ों लोग इसे अपने जीवन का हिस्सा बना चुके हैं। बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी इसके महत्व को समझ रहे हैं। विशेष रूप से महिलाओं और माताओं के लिए योग अत्यंत उपयोगी है तथा दृढ़ संकल्प के साथ जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करता है।
राज्यपाल ने कहा कि अभिभावकों के आचरण से ही नई पीढ़ी सीखती है, इसलिए सभी को नियमित योग अपनाना चाहिए।
उन्होंने महिलाओं से अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और प्रतिदिन योग करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
इस वर्ष की थीम “योगा फॉर हेल्दी एजिंग” का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह स्वस्थ, सक्रिय और संतुलित वृद्धावस्था का संदेश देती है।
भाषा आनंद रंजन
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