जामिया के कुलपति की ‘महादेव डीएनए’ टिप्पणी विभाजनकारी नहीं: भाजपा

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जामिया के कुलपति की ‘महादेव डीएनए’ टिप्पणी विभाजनकारी नहीं: भाजपा

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  • Publish Date - April 30, 2026 / 06:05 PM IST,
    Updated On - April 30, 2026 / 06:05 PM IST

नयी दिल्ली, 30 अप्रैल (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलपति मजहर आसिफ की इस टिप्पणी का बृहस्पतिवार को समर्थन किया कि सभी भारतीयों में “महादेव का डीएनए” है। पार्टी ने कहा कि इस बयान को लेकर की जा रही आलोचना “सभ्यतागत विचारों के प्रति घटती सहिष्णुता” को दर्शाती है।

भाजपा के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि आसिफ की टिप्पणी की शाब्दिक व्याख्या करना और फिर उसे “अवैज्ञानिक” बताकर खारिज करना उसके व्यापक अर्थ को नजरअंदाज करने के समान है। उन्होंने कहा कि भारतीय संदर्भ में इस तरह की टिप्पणियां “वैज्ञानिक प्रयोग पर आधारित” दावों के बजाय “सभ्यतागत उपमाएं” होती हैं।

मालवीय ने कहा, “ये (टिप्पणियां) एक साझा वंश, सांस्कृतिक निरंतरता और सहस्राब्दियों में आकार लेने वाली सामूहिक चेतना को दर्शाती हैं।”

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में मंगलवार को आयोजित युवा कुंभ कार्यक्रम के दौरान आसिफ की ओर से की गई कथित टिप्पणियों का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया, जिसके बाद वह विवादों में घिर गए।

वीडियो में आसिफ यह कहते सुने जा सकते हैं, “सभी भारतीयों का डीएनए महादेव से जुड़ा हुआ है। यहां बैठे सभी लोगों को देखकर मुझे नहीं लगता कि इन सभी की मातृभाषा, परवरिश या संस्कृति एक है।”

उन्होंने कहा, “भौगोलिक लिहाज से, और मैं यह बात भौगोलिक संदर्भ में कह रहा हूं, हो सकता है कि वे एक ही क्षेत्र से न हों। उनका धर्म भी अलग-अलग हो सकता है। फिर भी, इन सबके बावजूद, हम भारतीय हैं। हम भारतीय हैं, क्योंकि हमारे अंदर महादेव का डीएनए है।”

‘पीटीआई-भाषा’ इस वीडियो का स्वतंत्र रूप से सत्यापन नहीं कर सकी है।

मालवीय ने कहा कि आसिफ की टिप्पणियां विभाजनकारी नहीं, बल्कि जोड़ने वाली हैं और लंबे समय से चली आ रही बौद्धिक परंपरा को प्रतिध्वनित करती हैं, जो धार्मिक सीमाओं से परे है और भारत के लोगों को एक साझा सभ्यतागत विरासत के उत्तराधिकारी के रूप में मान्यता देती है।

भाजपा नेता ने कहा, “जो लोग इस तरह की अभिव्यक्तियों को जल्दबाजी में ‘अवैज्ञानिक’ करार देने में लगे हैं, वे गलत दृष्टिकोण अपना रहे हैं। सभ्यताएं केवल वैज्ञानिक शब्दावली पर ही नहीं खड़ी होतीं; वे उन प्रतीकों, उपमाओं और साझा विमर्श से पोषित होती हैं, जो अपनेपन की भावना को बढ़ावा देते हैं।”

मालवीय ने कहा कि हर चीज को केवल उनके शाब्दिक अर्थ तक समेटने से एकता की भावना को ही नुकसान पहुंचने का खतरा है।

उन्होंने कहा, “विवाद पैदा करने के बजाय उस भावना को समझना अधिक बुद्धिमानी भरा कदम होगा, जिसके तहत यह टिप्पणी की गई थी। यह टिप्पणी याद दिलाती है कि भिन्नताओं के बावजूद भारत की जड़ें आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं।”

भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विकास का जिक्र करते हुए मालवीय ने कहा कि देश के इतिहास में कभी भी अलग-थलग पहचानें नहीं रहीं हैं, बल्कि वे हमेशा ही आपस में गहराई से जुड़ी रही हैं।

उन्होंने मौलाना अबुल कलाम आजाद और वहीदुद्दीन खान जैसे नेताओं का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय मुसलमान देश की मिश्रित संस्कृति का अभिन्न अंग हैं।

मालवीय ने दावा किया, “मौलाना अबुल कलाम आजाद ने निरंतर यह तर्क दिया कि भारतीय मुसलमान भारत की मिश्रित संस्कृति का अभिन्न अंग हैं…। मौलाना वहीदुद्दीन खान ने यह कहकर इस दृष्टिकोण को और मजबूत किया कि धर्मांतरण से जातीयता या मूल जड़ों में कोई बदलाव नहीं होता है।”

उन्होंने कहा, “अल्लामा इकबाल के नाम से मशहूर मुहम्मद इकबाल ने भी भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत को स्वीकार किया था और भगवान राम को ‘इमाम-ए-हिंद’ यानी इस भूमि के लोगों के आध्यात्मिक मार्गदर्शक के रूप में वर्णित किया था।”

भाषा पारुल सुभाष

सुभाष