श्रीनगर, 29 सितंबर (भाषा) जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने मंगलवार को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) अधिनियम और नगरपालिका अधिनियम, 2000 में संशोधन समेत पांच विधेयकों को मंजूरी दी।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में सात विधेयक पेश किए थे। इनमें से दो विधेयक-मंत्रियों और विधायकों के वेतन में वृद्धि से संबंधित-वापस ले लिए गए, जबकि शेष पांच को सदन ने पारित कर दिया।
विधानसभा ने जम्मू-कश्मीर नगरपालिका अधिनियम, 2000 और जम्मू-कश्मीर वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 में संशोधन से जुड़े विधेयकों को मंजूरी दी।
सदन ने एक अन्य विधेयक भी पारित किया, जिसका उद्देश्य अनुमति आधारित नियंत्रण व्यवस्था की जगह नियम आधारित शासन व्यवस्था लागू करना है। इसके जरिये नागरिकों और उद्यमों को विश्वास के साथ योजना बनाने, निवेश करने और काम करने में सक्षम बनाने के साथ-साथ रोजगार सृजन, निवेश तथा दीर्घकालिक आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कारोबार सुगमता और जीवन सुगमता को प्रोत्साहित करना है।
विधानसभा ने कारोबार और जीवन सुगमता के लिए अपराधों को गैर-आपराधिक बनाने तथा उन्हें तर्कसंगत बनाने के उद्देश्य से कुछ अधिनियमों में संशोधन और कुछ कानूनों को निरस्त करने से संबंधित विधेयक भी पारित किया।
इसके अलावा सदन ने जम्मू-कश्मीर राज्य विधानमंडल सदस्यों की पेंशन से संबंधित अधिनियम में संशोधन से संबंधित एक विधेयक को भी मंजूरी दी।
दो विधेयक हालांकि वापस ले लिए गए। इनमें जम्मू-कश्मीर मंत्रियों और राज्य मंत्रियों के वेतन अधिनियम, 1956 में संशोधन से संबंधित विधेयक तथा जम्मू-कश्मीर राज्य विधानमंडल सदस्यों के वेतन एवं भत्ते अधिनियम, 1960 में संशोधन संबंधी विधेयक शामिल हैं।
जम्मू-कश्मीर नगरपालिका अधिनियम, 2000 में संशोधन वाले विधेयक पर सदन में चर्चा हुई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक आर एस पठानिया ने कहा कि वह यह समझ नहीं पा रहे हैं कि सरकार इन संशोधनों के जरिये क्या हासिल करना चाहती है।
उन्होंने कहा, ‘‘वे वार्ड का परिसीमन करना चाहते हैं, लेकिन सरकार ऐसा नहीं करती। यह मुख्य निर्वाचन अधिकारी का अधिकार है।’’ उन्होंने कहा कि विधेयक भ्रम पैदा करता है।
पठानिया ने विधेयक के अध्ययन के लिए सदन की समिति गठित करने की मांग की।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार वास्तव में पंचायत और नगर निकाय चुनाव कराना चाहती है।
पठानिया के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि विधायक एक अच्छे वकील हैं और वकीलों की खासियत होती है कि वे उस बात पर भी बहस करते हैं, जिस पर जरूरी नहीं कि वे विश्वास करते हों।
उमर ने कहा, ‘‘वे केवल अपने मुवक्किल का पक्ष मजबूती से रखने की कोशिश करते हैं। विधायक ने केवल गलती निकालने के लिए गलती तलाशने की कोशिश की। हमारा उद्देश्य अधिनियम में पांच सदस्यीय और सात सदस्यीय नगर निकायों को लेकर भ्रम दूर करना था। प्रत्येक नगर निकाय में न्यूनतम सात सदस्य होंगे।’’
मुख्यमंत्री ने सदन से भ्रम दूर करने के उद्देश्य से किए गए ‘छोटे संशोधनों’ को पारित करने की अपील की।
इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने विधेयक को मतदान के लिए रखा और इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया।
भाषा रवि कांत आशीष
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