नयी दिल्ली, छह अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने जनकपुरी में बाइक सवार की मौत के मामले में आरोपी उप-ठेकेदार की कथित अवैध हिरासत के संबंध में सीसीटीवी फुटेज की अनुपस्थिति पर स्पष्टीकरण के लिए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है।
यह मामला एचडीएफसी बैंक की रोहिणी शाखा में सहायक प्रबंधक के पद पर कार्यरत कमल ध्यानी की मृत्यु से संबंधित है। दिल्ली जल बोर्ड द्वारा कथित रूप से खुला छोड़े गए 15 फुट गहरे गड्ढे में बाइक समेत गिरने से ध्यानी की मौत हो गई थी।
न्यायिक मजिस्ट्रेट हरजोत सिंह औजला उप-ठेकेदार राजेश कुमार प्रजापति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। याचिका में प्रजापति ने उसे दिल्ली पुलिस द्वारा अवैध हिरासत रखने का आरोप लगाया है।
न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जनकपुरी थाने के प्रभारी (एसएचओ) और एक उपनिरीक्षक (एसआई) को नोटिस जारी कर छह फरवरी से आठ फरवरी तक के डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (डीवीआर) फुटेज को पेश करने को कहा।
अदालत ने चार अप्रैल के फैसले में कहा, ‘संबंधित एसएचओ को यह स्पष्ट करने का अवसर दिया जाता है कि क्या आरोपी को एसआई मनोज के साथ रखा गया था और यदि हां, तो संबंधित सीसीटीवी फुटेज पेश करें।’
अदालत ने गौर किया कि आरोपी के कोई कॉल डेटा रिकॉर्ड (सीडीआर) या ‘लोकेशन ट्रैकिंग’ दस्तावेज रिकॉर्ड में नहीं रखे गए थे और मुख्य मामले की फाइल भी उसके सामने पेश नहीं की गई है।
इसने यह भी पाया गया कि थाने के पिछले गेट से संबंधित अवधि का कोई डीवीआर फुटेज उपलब्ध नहीं था। इसी द्वार से कथित तौर पर आरोपी को लाया गया था।
मजिस्ट्रेट ने कहा, ‘संबंधित एसएचओ को अदालत का नोटिस जारी कर जनकपुरी थाने के पिछले गेट पर सीसीटीवी कैमरा लगाने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में स्पष्टीकरण मांगा जाए और साथ ही आरोपी को जिस स्थान से पकड़ा गया था, उस स्थान की लोकेशन ट्रैकिंग और छह फरवरी 2026 को शाम 6:00 बजे से आठ फरवरी 2026 को सुबह 10:00 बजे तक की आरोपी की सीडीआर लिखित में प्रस्तुत करने को कहा जाए।’
अदालत के सवालों का जवाब देते हुए, जांच अधिकारी (आईओ) ने बताया कि पिछले गेट के पास लगा सीसीटीवी कैमरा उस समय चालू नहीं था और इसलिए कोई फुटेज प्राप्त नहीं की जा सकी।
अदालत ने दलीलों पर ध्यान देते हुए संबंधित एसएचओ को यह स्पष्ट करने का अवसर दिया कि क्या आरोपी को किसी विशेष अधिकारी द्वारा थाने लाया गया था और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत करने को कहा।
आरोपी ने दावा किया है कि उसे छह फरवरी को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया था, जबकि उसकी गिरफ्तारी औपचारिक रूप से एक दिन बाद दर्ज की गई, जिससे उसकी हिरासत की परिस्थितियों पर सवाल उठते हैं। इसके बाद मामले की आगे की कार्यवाही के लिए आठ अप्रैल की तारीख तय की गई।
भाषा नोमान नोमान रंजन
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