झारखंड परीक्षा विवाद: सरकार ने नए दौर की वार्ता शुरू की, अनशन पर बैठे छात्र नेता की तबीयत बिगड़ी

झारखंड परीक्षा विवाद: सरकार ने नए दौर की वार्ता शुरू की, अनशन पर बैठे छात्र नेता की तबीयत बिगड़ी

झारखंड परीक्षा विवाद: सरकार ने नए दौर की वार्ता शुरू की, अनशन पर बैठे छात्र नेता की तबीयत बिगड़ी
Modified Date: August 9, 2026 / 03:34 pm IST
Published Date: August 9, 2026 3:34 pm IST

रांची, नौ अगस्त (भाषा) झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 16वें दिन भी जारी छात्रों के आंदोलन के बीच रविवार को प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के साथ फिर बातचीत शुरू की है।

सरकार और छात्र संगठनों के बीच शुक्रवार रात और शनिवार को दिनभर हुई बैठकों के बावजूद गतिरोध दूर नहीं हो सका जिसके बाद रविवार को एक और दौर की बातचीत करने का फैसला लिया गया था।

इस बीच, रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में करीब एक सप्ताह से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की हालत शनिवार देर रात करीब तीन बजे अचानक बिगड़ गई। डॉक्टरों ने उनका रक्त शर्करा स्तर 53 दर्ज किया।

एक अन्य छात्र राहुल क्रांतिम भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं और वह सदर अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में चिकित्सकीय निगरानी में है।

कुल मिलाकर छह प्रदर्शनकारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।

डुमरी के विधायक और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के प्रमुख जयराम महतो ने आंदोलन कर रहे छात्रों के समर्थन में पुराने विधानसभा परिसर में एक दिन का उपवास रखा।

‘तिरंगा मैन’ के नाम से लोकप्रिय सामाजिक कार्यकर्ता राजेश हिंदुस्तानी भी रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में छात्रों के प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने दावा किया कि अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के समय से वह पिछले 15 वर्षों से तिरंगा लेकर चल रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ मैं हर दिन तिरंगा लेकर चलता हूं, ताकि लोगों को संविधान में लिखी बातों की याद दिला सकूं।’’

इससे पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) का प्रश्नपत्र लीक होने के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन में शामिल हो चुके कार्यकर्ता ने कहा, ‘‘जब मुझे पता चला कि झारखंड के छात्र परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, तो मैं उनके साथ शामिल हो गया।’’

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, झारखंड भाजपा अध्यक्ष एवं सांसद आदित्य साहू और पार्टी के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल भी रविवार सुबह जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचे और प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की।

सेठ ने कहा, ‘‘ मुख्यमंत्री को आंदोलन के पहले ही दिन छात्रों से मिलना चाहिए था। लेकिन वह चुप रहे। सरकार अलग-अलग संगठनों को बातचीत के लिए बुलाकर और उनकी मांगों का विवरण मांगकर अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति अपना रही है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ अब बातचीत की कोई जरूरत नहीं है। छात्रों की मांगें स्पष्ट हैं-परीक्षा रद्द की जाए और अनियमितताओं की जांच सीबीआई से कराई जाए।’’

राज्य सरकार ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे ‘जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मंच’ के साथ शुक्रवार रात बातचीत की थी। इसके बाद शनिवार को सरकार ने विभिन्न छात्र संगठनों के साथ चार दौर की बातचीत की जिनमें कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई, झारखंड छात्र मोर्चा और आदिवासी छात्र संघ शामिल हैं।

ये बैठकें बेनतीजा रहने के बाद सरकार ने रविवार दोपहर करीब 12 बजे छात्र प्रतिनिधियों के साथ छठे दौर की बातचीत करने का फैसला किया।

इस फैसले के तुरंत बाद जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मंच ने सरकार पर ‘राजनीतिक चालबाजी’ का आरोप लगाया और कहा कि इस कदम का मकसद आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच फूट डालना और उनकी मुख्य मांगों से लोगों का ध्यान भटकाना है।

जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मंच के नेता रविंद्र पासवान ने आरोप लगाया कि सरकार ऐसे संगठनों के साथ बातचीत कर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, जिनकी मौजूदा आंदोलन में ‘‘कोई भूमिका नहीं रही।’’

पासवान ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘यह सरकार की राजनीतिक चाल है। वह छात्रों में विभाजन पैदा करने और लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। लेकिन उसे पता होना चाहिए कि सभी छात्र एकजुट हैं।’’

शनिवार को मंत्रियों दीपिका पांडेय सिंह, सुदिव्य कुमार, चामरा लिंडा और संजय प्रसाद यादव वाली समिति ने एनएसयूआई, झारखंड छात्र मोर्चा और आदिवासी छात्र संघ के साथ अलग-अलग बैठकें कीं और उनसे उनकी मांगों का विवरण मांगा।

सरकार ने हालांकि कहा कि बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई और वह प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की चिंताओं पर विचार कर रही है।

झारखंड छात्र मोर्चा ने पांच मांगें रखी हैं, जिनमें 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा रद्द करना शामिल है। वहीं एनएसयूआई ने छह मांगें रखीं, जिनमें संदेह के घेरे में आने वाली सभी जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं की 90 दिनों के भीतर सीआईडी जांच और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की तर्ज पर झारखंड परीक्षा एजेंसी की स्थापना शामिल है।

आदिवासी छात्र संघ के नेता कार्तिक उरांव ने भर्ती परीक्षाओं में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को अनिवार्य योग्यता वाले विषयों के रूप में शामिल करने तथा जिन परीक्षाओं में अनियमितताएं पाई गई हैं, उन्हें रद्द करने की मांग की।

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में सुधार के संबंध में अभ्यर्थियों से सुझाव लेने के लिए सरकार ने एक ईमेल आईडी जारी की है।

बातचीत जारी रहने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि सभी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सरकार के रविवार तक मांगें पूरी नहीं करने पर 10 अगस्त को विधानसभा मार्च निकालने की भी घोषणा की है।

इस बीच, अखिल भारतीय छात्र संघ (आइसा) ने शनिवार को स्टेडियम में अपना अलग मंच बनाया। हालांकि, उसके नेताओं ने कहा कि इसे अलग आंदोलन नहीं माना जाना चाहिए।

आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, जिन पर शुक्रवार को बिरसा चौक के पास विधानसभा मार्च के दौरान स्याही फेंकी गई थी, थोड़ी देर के लिए प्रदर्शन में शामिल हुईं। उन्होंने 14वीं जेपीएससी और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षाओं को रद्द करने की मांग को लेकर नारे लगाए।

संगठन की रांची इकाई के प्रमुख विजय कुमार ने कहा कि उसके सदस्य 10 अगस्त के मार्च में शामिल होंगे, लेकिन अखिल भारतीय छात्र संघ के बैनर के बिना।

आंदोलन के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्यों ने भी प्रदर्शन किया है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास के पास अवरोधक तोड़ने की कोशिश के दौरान उनकी पुलिस से झड़प हुई थी।

उप पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) अजय आर्यन ने बताया कि मार्च के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के करीब आठ से 10 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने 11 अगस्त को अलग विधानसभा मार्च निकालने की घोषणा की है।

जेपीएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के संबंध में अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। परीक्षा समिति के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से 28 जुलाई के बाद से चार बार पूछताछ की जा चुकी है।

भाषा शोभना संतोष

संतोष


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