पेपर लीक विरोधी प्रदर्शन के बीच झारखंड सरकार ने विभिन्न संगठनों से की बातचीत, गतिरोध बरकरार
पेपर लीक विरोधी प्रदर्शन के बीच झारखंड सरकार ने विभिन्न संगठनों से की बातचीत, गतिरोध बरकरार
रांची, आठ अगस्त (भाषा) झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित प्रश्नपत्र लीक को लेकर जारी प्रदर्शनों के बीच शनिवार को विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने अपनी सभी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है।
सरकार की पांच सदस्यीय समिति ने सबसे पहले जेएलकेएम नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व वाले प्रदर्शनकारी गुट से मुलाकात की, महतो का इस मुद्दे को लेकर अनशन का शनिवार को सातवां दिन है। इस समिति में राज्य के तीन मंत्री भी शामिल हैं। इसके बाद समिति ने कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई, एसीएस और जेसीएम के प्रतिनिधिमंडलों से बातचीत की।
इससे पहले शुक्रवार रात को सरकार ने जेपीएससी/जेएसएससी रिफॉर्म मंच के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भी इसी तरह की वार्ता की थी।
सरकार की ओर से गठित समिति के सदस्य और राज्य के मंत्री संजय प्रसाद यादव ने लगातार हुई बैठकों के बाद कहा, ‘‘प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की मांगें जायज हैं। हम इन्हें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सामने रखेंगे।’’
सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की छात्र इकाई झारखंड छात्र मोर्चा (जेसीएम) ने सरकार के सामने पांच मांगें रखीं, जिनमें 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने की मांग भी शामिल है।
एनएसयूआई के प्रवक्ता संजीव शाह ने बताया कि संगठन ने सरकार के सामने छह मांगें रखीं। इनमें संदेह के घेरे में आई सभी जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं की 90 दिनों के भीतर सीआईडी जांच और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की तर्ज पर झारखंड परीक्षा एजेंसी (जेटीए) की स्थापना की मांग शामिल है।
आदिवासी छात्र संघ के नेता कार्तिक उरांव ने कहा, ‘‘ हमने भर्ती परीक्षाओं में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को योग्यता परीक्षा के रूप में शामिल करने की मांग की है। इसके अलावा जिन परीक्षाओं में अनियमितताएं मिली हैं, उन्हें रद्द करने की मांग भी रखी गई है।’’
राज्य के मंत्री चामरा लिंडा ने कहा, ‘‘यह संभवत: छात्र संगठनों के साथ हमारी आखिरी बैठक थी। उन्होंने भर्ती में रिक्तियों और जनजातीय भाषाओं के संरक्षण समेत दो अन्य मुद्दे उठाए।’
सरकार की समिति की पहली बैठक महतो गुट के जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी मंच के साथ हुई, जो करीब दो घंटे तक चली।
मंच के एक नेता ने बैठक के बाद कहा, ‘‘सरकार ने हमारी ओर से उठाए गए मुद्दों के समाधान के लिए जल्द निर्णय लेने का आश्वासन दिया है। हालांकि, 14वीं जेपीएससी परीक्षा रद्द करने समेत हमारी सभी मांगें पूरी होने तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा।’’
राज्य की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई और छात्रों ने भर्ती प्रक्रिया में जो विसंगतियां बताई हैं उनका जल्द समाधान किया जाएगा।
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने बताया कि सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए अभ्यर्थियों से सुझाव लेने के लिए ई-मेल आईडी जारी की है।
पेपर लीक के विरोध में जारी प्रदर्शन का शनिवार को 15वां दिन है।
देवेंद्र नाथ महतो ने ‘‘पीटीआई-भाषा’’ से कहा, ‘‘हम 14वीं झारखंड पीएससी सिविल सेवा परीक्षा और उस एजेंसी की ओर से आयोजित सभी परीक्षाओं को तत्काल रद्द करने की मांग कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि छात्र पिछले दो सप्ताह से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं, इसलिए राज्य सरकार को उनकी मांगें तुरंत पूरी करनी चाहिए।
महतो ने कहा, ‘‘सरकार को इसमें देरी नहीं करनी चाहिए। वह इन मांगों पर क्या कदम उठाती है, यह देखने वाली बात होगी। अगर शुक्रवार को 10 सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बातचीत के बाद ही सरकार मांगें मान लेती तो शनिवार की बैठक की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि हमारी मांगें लगभग समान हैं।’’
उन्होंने अपनी स्वास्थ्य स्थिति का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘ मेरी तबीयत दिन-ब-दिन खराब हो रही है। रक्तचाप और शुगर का स्तर गिर रहा है। डॉक्टर ने छाती में संक्रमण की जानकारी दी है और अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी है। अगर यही स्थिति जारी रही तो यह मेरे लिए खतरनाक हो सकता है। मैं अब केवल सुन पा रहा हूं, सोच पा रहा हूं और धीरे-धीरे बोल पा रहा हूं।’’
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जांच या तो केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराई जाए या फिर राज्य के बाहर के उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की समिति गठित की जाए।
अब तक जेपीएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मामले में 19 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से 28 जुलाई से अब तक चार बार पूछताछ की जा चुकी है।
भाषा शोभना पवनेश
पवनेश

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