झारखंड उच्च न्यायालय ने जेलों में डॉक्टरों की कमी पर स्वत: संज्ञान लेते हुए याचिका दर्ज की

Ads

झारखंड उच्च न्यायालय ने जेलों में डॉक्टरों की कमी पर स्वत: संज्ञान लेते हुए याचिका दर्ज की

  •  
  • Publish Date - April 30, 2026 / 09:49 PM IST,
    Updated On - April 30, 2026 / 09:49 PM IST

रांची, 30 अप्रैल (भाषा) झारखंड उच्च न्यायालय ने पूरे राज्य की जेलों में डॉक्टरों की कमी को लेकर बृहस्पतिवार को स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की।

न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ एक आपराधिक अपील पर सुनवाई कर रही थी, तभी उसे सूचित किया गया कि अपीलकर्ता किडनी की समस्याओं से पीड़ित था और उसकी जेल में उचित इलाज न मिल पाने के कारण मौत हो गई है।

पीठ को बताया गया कि अपीलकर्ता ने अपनी सजा को निलंबित करने और उसे जेल से रिहा करने के अनुरोध के साथ एक याचिका दाखिल की थी, ताकि वह निजी अस्पताल में बेहतर इलाज करा सके।

अपीलकर्ता ने याचिका में कहा था कि जेल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाएं उसके उपचार के लिए पर्याप्त नहीं हैं और उसे निजी अस्पताल में बेहतर इलाज हासिल करने के लिए जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए।

राज्य सरकार ने मामले में अपना जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से कार्यवाही को स्थगित करने का अनुरोध किया था।

सरकार अपना जवाब दाखिल कर पाती, उससे पहले ही अदालत को सूचित किया गया कि याचिका दायर करने वाले मरीज की उचित इलाज न मिल पाने के कारण जेल में मौत हो गई।

उच्च न्यायालय ने इस मामले को गंभीरता से लिया और जेलों में डॉक्टरों के रिक्त पदों के बारे में सरकार से जवाब तलब किया।

उच्च न्यायालय को बताया गया कि राज्य भर की जेलों में डॉक्टरों के 43 स्वीकृत पदों में से 42 रिक्त हैं। उसे यह भी बताया कि जेलों में चिकित्सा सुविधाओं और बुनियादी ढांचे की भी कमी है।

झारखंड में रांची, जमशेदपुर, हजारीबाग, देवघर, दुमका और गिरिडीह में छह केंद्रीय कारागार हैं। केंद्रीय कारागार के अलावा पलामू (मेदिनीनगर) और सिमडेगा में स्थित जेल सहित 16 जिला जेल और छह उप-जेल हैं।

खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद और जेलों में डॉक्टरों की भारी कमी को देखते हुए स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की और इसे आगे सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष भेज दिया।

उसने उचित उपचार न मिलने के कारण जेल में दम तोड़ने वाले अपीलकर्ता के परिजनों को सरकार से मुआवजे की मांग करने की अनुमति दे दी।

भाषा पारुल वैभव

वैभव