गिरफ्तारी के खिलाफ तत्काल सुनवाई का अनुरोध करने पर पत्रकार को फटकार

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गिरफ्तारी के खिलाफ तत्काल सुनवाई का अनुरोध करने पर पत्रकार को फटकार

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  • Publish Date - September 30, 2026 / 04:59 PM IST,
    Updated On - September 30, 2026 / 04:59 PM IST

अहमदाबाद, 30 सितंबर (भाषा) गुजरात उच्च न्यायालय ने बुधवार को पत्रकार रवि नायर को इस बात को लेकर फटकार लगाई कि उन्होंने अडाणी इंटरप्राइजेज की ओर से दायर आपराधिक मानहानि मामले में गिरफ्तारी पर रोक के अनुरोध वाली अपनी याचिका पर तत्काल सुनवाई का आग्रह किया, लेकिन यह नहीं बताया कि वह जमानत के लिए अधीनस्थ अदालत का भी रुख कर चुके हैं।

न्यायमूर्ति एमके ठक्कर की एकल पीठ ने नायर की याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि सत्र अदालत ने उन्हें पिछले हफ्ते ही जमानत दे दी थी।

पीठ ने नायर के वकील से इस बात को लेकर नाखुशी जाहिर की कि उन्होंने उच्च न्यायालय में 19 सितंबर को तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था, लेकिन यह नहीं बताया था कि उनके मुवक्किल ने जमानत के लिए सत्र अदालत में भी अर्जी दाखिल की है।

उच्च न्यायालय ने कहा, “शीर्ष अदालत के तय कानून के अनुसार… जो पक्ष इस अदालत के असाधारण अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करता है, उससे उम्मीद की जाती है कि वह पूरी ईमानदारी, स्पष्टता और खुलेपन के साथ अदालत के सामने आए। ऐसे पक्ष की जिम्मेदारी है कि वह बिना किसी हिचकिचाहट के सभी जरूरी तथ्य बताए, भले ही वे तथ्य उसके मामले के खिलाफ क्यों न हों।”

गांधीनगर की एक अपीलीय अदालत ने नायर को उनकी गिरफ्तारी के एक हफ्ते बाद 24 सितंबर को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। उन्हें आपराधिक मानहानि के मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ दायर अपील की सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से पेश न होने पर गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद गिरफ्तार किया गया था।

गिरफ्तारी के बाद नायर के वकीलों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर सत्र अदालत के उस आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया था, जिसके तहत उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट को निरस्त करने की उनकी अर्जी ठुकरा दी गई थी।

नायर के वकील ने उसी अपीलीय अदालत में जमानत के लिए भी अर्जी दी थी, जिसे 24 सितंबर के आदेश के जरिये मंजूरी दे दी गई।

उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि इस घटनाक्रम के बाद अदालत मामले के गुण-दोष पर कोई आदेश पारित करने या विवादित आदेश के संबंध में कोई टिप्पणी करने से परहेज करेगी। इसी के साथ उसने नायर की याचिका का निपटारा कर दिया।

अडाणी इंटरप्राइजेज ने नायर के कुछ ट्वीट और लेख को लेकर उनके खिलाफ तीन सितंबर 2021 को आपराधिक मानहानि का मामला दायर किया था। गांधीनगर की मनसा अदालत ने नायर को मामले में दोषी करार देते हुए गत 10 फरवरी को एक साल की जेल की सजा सुनाई थी।

भाषा पारुल माधव

माधव