न्यायमूर्ति रवींद्र विठ्ठलराव घुगे ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ली

न्यायमूर्ति रवींद्र विठ्ठलराव घुगे ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ली

न्यायमूर्ति रवींद्र विठ्ठलराव घुगे ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ली
Modified Date: September 9, 2026 / 12:49 pm IST
Published Date: September 9, 2026 12:49 pm IST

कोलकाता, नौ सितंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर. एन. रवि ने न्यायमूर्ति रवींद्र विठ्ठलराव घुगे को कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद की बुधवार को शपथ दिलाई।

शपथ ग्रहण के बाद मुख्य न्यायाधीश ने अपने संबोधन में लंबित मामलों से निपटने और यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि ‘‘इस महान संस्थान में अंतिम हितधारक आम लोगों का विश्वास अडिग रहे।’’

अदालत कक्ष-एक में आयोजित इस शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

मुख्य न्यायाधीश ने अदालतों को अधिक सुलभ बनाने और उनके कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल का आह्वान करते हुए कहा, ‘‘जैसा कि हम भविष्य की ओर देख रहे हैं, हमें यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए कि समाज के सबसे हाशिए पर पड़े लोगों के लिए न्याय के दरवाजे खुले रहें।’’

मुख्य न्यायाधीश ने पीठ और बार को ‘‘न्याय रथ के दो पहिए’ बताते हुए कहा, ‘‘मैं अपनी बहन और भाई न्यायाधीशों तथा इस जीवंत बार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के लिए उत्सुक हूं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह रथ सुचारू और निष्पक्ष रूप से आगे बढ़े।’

पीठ और बार को ‘न्याय के स्वर्ण रथ के दो पहिए’ बताते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘मैं सहयोगियों तथा इस जीवंत बार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के लिए उत्सुक हूं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह रथ सुचारू और निष्पक्ष रूप से आगे बढ़े।’’

शपथ ग्रहण और नागरिक अभिनंदन के बाद अपने संबोधन में उन्होंने कहा, ‘‘मैंने पश्चिमी तट से पूर्वी तट तक का सफर किया और कुछ ज्यादा अंतर नहीं पाया। हमारे महान राष्ट्र, भारत के सबसे पुराने उच्च न्यायालय का नेतृत्व सौंपा जाना एक सम्मान की बात है जिसे शब्दों से बयां नहीं किया जा सकता।’’

उन्होंने कलकत्ता उच्च न्यायालय को एक ऐसा संस्थान बताया जिसने भारत के संवैधानिक मूल्यों और न्यायिक परिदृश्य को आकार दिया।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से बंगाल भारत के पुनर्जागरण का प्रमुख केंद्र और स्वतंत्रता संग्राम की महत्वपूर्ण धरती रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘मुंबई उच्च न्यायालय जैसे एक अन्य ऐतिहासिक एवं प्रतिष्ठित संस्थान से यहां आने के बाद मैं निरंतरता, जिम्मेदारी और साझा संवैधानिक उद्देश्य की गहरी भावना महसूस कर रहा हूं।’’

न्यायमूर्ति घुगे को 21 जून 2013 को मुंबई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था और एक जून 2026 को उन्हें वहां कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।

उच्च न्यायालय की वेबसाइट के अनुसार, 1990 में कोल्हापुर स्थित शाहजी विधि महाविद्यालय और औरंगाबाद स्थित एमपी विधि महाविद्यालय से पांच वर्षीय विधि पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद उन्होंने उसी वर्ष मुंबई उच्च न्यायालय में वकालत शुरू की थी।

उन्होंने शुरूआत में लगभग 2,000 मामलों में श्रमिकों और यूनियनों का प्रतिनिधित्व किया और उच्च न्यायालय, श्रम और औद्योगिक अदालतों और न्यायाधिकरणों में कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों और निजी उद्योगों सहित लगभग 250 उद्योगों के लिए मामलों की पैरवी की।

भाषा खारी मनीषा

मनीषा


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