कारगिल विजय दिवस के 19 बरस, देश के लिए जान कुर्बान करने वालों को याद कर रहा पूरा देश

कारगिल विजय दिवस के 19 बरस, देश के लिए जान कुर्बान करने वालों को याद कर रहा पूरा देश

कारगिल विजय दिवस के 19 बरस, देश के लिए जान कुर्बान करने वालों को याद कर रहा पूरा देश
Modified Date: November 29, 2022 / 08:21 pm IST
Published Date: July 26, 2018 6:16 am IST

नई दिल्ली। कारगिल विजय दिवस को आज 19 बरस पूरे हो गए। आज के दिन कारगिल की चोटी पर पाकिस्तानी सेना को परस्त कर तिरंगा लहराया गया था। कारगिल विजय दिवस के 19 बरस पर हमारे वीर जवानों को आज पूरा देश याद कर रहा है। 1999 में दुश्मन देश को धूल जटाकर अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों की याद में पूरा देश कारगिल विजय दिवस माना रहा है। द्रास वॉर मेमोरियल में लोगों ने 1999 के कारिगल युद्ध में शहीद जवानों को श्रृद्धांजलि अर्पित की। आज उनके साहस व बलिदान की गाथा को याद किया जा रहा है।

पढ़ें- पाकिस्तान चुनाव: इमरान खान के स्विंग में फंसे शहबाज शरीफ और बिलावल भुट्टो, दोनों की हार

पीएम मोदी ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर शहीदों को याद करते हुए ट्वीट कर लिखा, ‘कारगिल विजय दिवस पर राष्ट्र उन लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है, जिन्होंने ऑपरेशन विजय के दौरान देश की सेवा की। हमारे बहादुर सैनिकों ने यह सुनिश्चित किया कि भारत सुरक्षित रहे और शांति के माहौल को खराब करने की कोशिश करने वालों को उचित उत्तर दिया।’

उन्होंने अटल जी का जिक्र करते हुए कहा, ‘ऑपरेशन विजय के दौरान अटल जी द्वारा प्रदान किए गए उत्कृष्ट राजनीतिक नेतृत्व को भारत हमेशा गर्व के साथ याद रखेगा। उन्होंने आगे से नेतृत्व किया, हमारे सशस्त्र बलों का समर्थन किया और विश्व स्तर पर भारत के स्टैंड को स्पष्ट किया।’

युद्ध को 19 बरस पूरे हो गए हैं। जंग का आगाज मई में हुआ था और 26 जुलाई को भारतीय सेना ने करगिल पर तिरंगा फहरा दिया था। जंग में सेना के दमखम के अलावा भी एक अहम किरदार था- सेना के डॉक्टर। इन डॉक्टरों ने घायल सैनिकों के इलाज में अदम्य साहस दिखाया था। कुछ डॉक्टर सीमा पर घायल जवानों का इलाज कर रहे थे, तो बाकी अस्पताल में। 4 डॉक्टरों को गैलेंट्री अवॉर्ड भी मिला। सेना के अस्पताल के बारे में कहा जाता है अगर मरीज की एक सांस भी बची है और उसे अस्पताल ले आया गया, तो यहां के डॉक्टर सांस उखड़ने नहीं देते। बात सही भी है। करगिल के दौरान हजार से ज्यादा घायल सैनिकों को आर्मी हॉस्पिटल लाया गया। इनमें से 14 ही ऐसे थे, जिन्हें बचाया नहीं जा सका। ।

पढ़ें- मराठा क्रांति मोर्चा ने सात जिलों में हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी के बाद बंद वापस लिया

जब भी कारगिल युद्ध की बात होती है, तो कैप्टन सौरभ कालिया का नाम सबसे पहले गूंजता है। कैप्टन सौरभ कालिया ने कारगिल में पाकिस्तानी सैनिकों की बड़ी घुसपैठ का सामना किया था। 5 मई, 1999 को कैप्टन कालिया और उनके 5 साथियों को पाकिस्तानी सैनिकों ने बंदी बना लिया था। 20 दिन बाद वहां से भारतीय जवानों के शव वापस आए। लेकिन अटॉप्सी रिपोर्ट सामने आई, तो पूरा देश में नाराजगी थी, जिसमें पता चला कि भारतीय जवानों के साथ पाकिस्तान ने बेरहमी की गई। उन्हें सिगरेट से जलाया गया था और उनके कानों में लोहे की सुलगती छड़ें घुसेड़ी गई थीं। सौरभ कालिया के साथ उनके पांच साथी नरेश सिंह, भीखा राम, बनवारी लाल, मूला राम और अर्जुन राम भी थे। ये सभी काकसर की बजरंग पोस्ट पर गश्त लगा रहे थे, जब ये दुश्मन के हाथों पकड़े गए।

आज से 18 साल पहले भारत और पाकिस्तान के बीच कारगिल का युद्ध लड़ा गया था। लगभग दो महीने तक चले इस युद्ध में दोनों देशों के कई सैनिक मारे गए थे और आज के दिन यानी 26 जुलाई, 1999 में भारत ने कारगिल की जंग जीत ली थी, तभी से इस दिन को कारगिल विजय दिवस के रूम में मनाया जा रहा है। कारगिल की दुर्गम चोटियों में लड़े गए युद्ध में पाकिस्तान को करारी मात देते हुए भारतीय सेना के 527 जवानों, अधिकारियों ने वीरगति पाई थी। इनमें 71 जम्मू कश्मीर से थे।

 

वेब डेस्क, IBC24


लेखक के बारे में