कर्नाटक कैबिनेट ने समुद्री जैव प्रौद्योगिकी नीति मंजूर की
कर्नाटक कैबिनेट ने समुद्री जैव प्रौद्योगिकी नीति मंजूर की
मंगलुरु (कर्नाटक), 18 सितंबर (भाषा) कर्नाटक सरकार ने राज्य के समुद्री उत्पादों की अर्थव्यवस्था अनुमानित दो अरब डॉलर से 2031 तक 6-8 अरब डॉलर तक पहुंचाने के उद्देश्य से पंचवर्षीय समुद्री जैव प्रौद्योगिकी नीति को शुक्रवार को मंजूरी दे दी।
राज्य के उपमुख्यमंत्री डॉक्टर जी. परमेश्वर ने यह जानकारी देते हुए कहा कि यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कुल 61 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
उन्होंने कहा कि कर्नाटक समुद्री जैव प्रौद्योगिकी नीति 2026-31 के तहत समुद्री जैव प्रौद्योगिकी, समुद्री शैवाल से बने उत्पादों, समुद्री जैव सामग्रियों, जैव विनिर्माण, सतत जलीय कृषि और अन्य उच्च मूल्य के उपयोगों को लेकर एक पारितंत्र विकसित किया जाएगा।
परमेश्वर ने कहा कि कर्नाटक का 343.3 किलोमीटर का समुद्र तट है और सरकार ने अगले पांच वर्षों में इस नीति को लागू करने के लिए 120 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
उन्होंने कहा कि इसके तहत अनुसंधान, नवाचार, प्रौद्योगिकी के व्यावसायिक उपयोग और समुद्री जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विकास के लिए कर्नाटक इंस्टीट्यूट ऑफ मरीन बायोटेक्नोलॉजी एंड ब्लू इकोनॉमी नाम से एक संस्थान स्थापित करने की तैयारी की है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने मत्स्य पालन विभाग के साथ मिलकर समर्पित समुद्री जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्रों के निर्माण का भी प्रस्ताव किया है।
परमेश्वर ने बताया कि हाइड्रोकोलाइड्स, न्यूट्रासिटिकल्स, बायो फर्टिलाइजर जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए एक सीवीड वैल्यू एडिशन प्रोडक्शन लिंक्ड इनसेंटिव भी प्रस्तावित है।
सरकार को इस नीति से करीब 2,500 तकनीकी नौकरियां और 7,500 तटीय उपक्रमों का सृजन होने की उम्मीद है।
भाषा सं राजेंद्र जोहेब
जोहेब

Facebook


