कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने कावेरी मुद्दे पर बुलाई सर्वदलीय बैठक: उपमुख्यमंत्री परमेश्वर

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने कावेरी मुद्दे पर बुलाई सर्वदलीय बैठक: उपमुख्यमंत्री परमेश्वर

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  • Publish Date - July 29, 2026 / 03:16 PM IST,
    Updated On - July 29, 2026 / 03:16 PM IST

बेंगलुरु, 29 जुलाई (भाषा) कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने बुधवार को कहा कि मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने एक सर्वदलीय बैठक बुलाने का प्रस्ताव दिया है। यह फैसला कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूसी) द्वारा कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने का निर्देश देने के बाद लिया गया है।

उपमुख्यमंत्री ने साफ किया कि राज्य में पानी की कमी है, और पीने के पानी की जरूरतें पूरी करने के लिए भी पर्याप्त पानी नहीं है। ऐसी स्थिति में पानी छोड़ना मुमकिन नहीं है, इसलिए सरकार सोच-समझकर सही फैसला लेगी।

सीडब्ल्यूसी ने मंगलवार को कर्नाटक को निर्देश दिया था कि वह 29 जुलाई से अगले 15 दिनों तक बिलिगुंडलू में 3,500 क्यूसेक पानी का बहाव सुनिश्चित करे, जो कुल मिलाकर लगभग चार टीएमसी पानी के बराबर होता है।

परमेश्वर ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने का प्रस्ताव दिया है। ऐसे मुद्दे उठते रहते हैं। जब पानी उपलब्ध होता है, तो उन्हें (तमिलनाडु को) मांगने की ज़रूरत नहीं पड़ती; हम पानी छोड़ देते हैं। चाहे पिछले साल की बात हो या उससे पहले के साल की, हमने उन्हें आवंटित मात्रा से ज़्यादा पानी छोड़ा था।’’

उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘‘जब इस बार स्थिति ऐसी है कि हमारे पास पीने का भी पर्याप्त पानी नहीं है, तो हमसे 3,500 क्यूसेक पानी का बहाव बनाए रखने के लिए कहना कितना सही है? जब हमारे पास पानी होगा, हम इसे छोड़ देंगे, इसमें कोई समस्या नहीं है। मुख्यमंत्री ने इस मामले पर चर्चा के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाने का प्रस्ताव दिया है।’’

परमेश्वर ने तीन अगस्त को वार्ता के लिए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के बेंगलुरु आने की संभावना पर कहा, ‘‘अभी इसकी पुष्टि होना बाकी है। अगर वह आते हैं, तो हम उनके साथ भी इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे।’’

बुधवार को मुख्यमंत्री द्वारा नयी दिल्ली में कानूनी विशेषज्ञों और राज्य की टीम के साथ कावेरी मुद्दे पर की जा रही बातचीत के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘दिल्ली में सांसदों के साथ हुई हालिया बैठक के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन कटारकी और जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी सहित अन्य लोग मौजूद थे। मैं कुछ काम से बेंगलुरु लौट आया था। आज की बैठक में कोई निर्णय लिये जाने की संभावना है।’’

भाजपा ने मंगलवार को आरोप लगाया कि सीडब्ल्यूसी द्वारा तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने का निर्देश राज्य (कर्नाटक) का पक्ष प्रभावी ढंग से रखने में कांग्रेस सरकार की ‘‘विफलता’’ का नतीजा है।

भाजपा ने मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार से आग्रह किया कि वह पानी न छोड़ें, कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के समक्ष अपील दायर कर इस आदेश को तुरंत चुनौती दें, और आगे की राह पर चर्चा के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाएं।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मांड्या और आसपास के इलाकों में किसानों और विभिन्न संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन करना स्वाभाविक है, और इसी तरह के विरोध प्रदर्शन मंगलवार को भी हुए थे।

कावेरी नदी पर प्रस्तावित मेकेदातु परियोजना के खिलाफ तमिलनाडु के मुख्यमंत्री द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखे जाने के सवाल पर, परमेश्वर ने कहा, ‘‘उन्हें लिखने दीजिए। प्रधानमंत्री अदालत से ऊपर नहीं हैं। अदालत जो कुछ भी कहती है वही अंतिम होता है।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘अदालत ने खुद पूछा है कि कर्नाटक द्वारा अपने क्षेत्र के भीतर बांध बनाने में क्या समस्या है, जब तक आपके (तमिलनाडु के) लिए आवंटित पानी की मात्रा जारी की जा रही है। अगर उन्हें कोई आपत्ति है, तो उन्हें इसे अदालत के सामने रखना चाहिए।’’

तमिलनाडु मेकेदातु परियोजना का विरोध करता है, क्योंकि उसे डर है कि यदि इसका क्रियान्वयन किया गया तो इसका राज्य पर विपरीत असर पड़ेगा।

शिवकुमार और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के बीच होने वाली बैठक पर भाजपा की आपत्तियों के सवाल पर परमेश्वर ने कहा कि दोनों राज्यों के प्रमुख विभिन्न मुद्दों को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने के लिए मिल रहे हैं और संघीय व्यवस्था में इस तरह की बातचीत आम बात है।

भाषा सुरेश नरेश

नरेश