बेंगलुरु, 19 अगस्त (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने मंत्री बी. नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाने की विपक्ष की मांग को खारिज करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर विधानसभा की कार्यवाही बाधित कर रहे भाजपा और जद(एस) के सदस्यों का विरोध राजनीतिक अस्तित्व बचाए रखने के लिए किया जा रहा ‘नाटक’ है।
उन्होंने नागेंद्र को दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि कथित घोटाले में नागेंद्र की कोई भूमिका नहीं है।
कर्नाटक विधानसभा में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन कार्यवाही बाधित हुई। विपक्ष ने सदन में विरोध प्रदर्शन करते हुए मंत्री नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की।
विपक्ष एक राज्य संचालित निगम में करोड़ों रुपये के गबन के आरोपों का सामना कर रहे मंत्री नागेंद्र को हटाने की मांग कर रहा है।
शिवकुमार ने मंगलवार देर रात कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, “अपने अस्तित्व के संकट का सामना कर रहे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (सेक्युलर) सच्चाई जानते हुए भी यह बड़ा नाटक कर रहे हैं। हमने उनसे कहा है कि वे नोटिस दें, चर्चा करें और हमें (सरकार को) समझाएं कि नागेंद्र को क्यों हटाया जाना चाहिए। हम बताएंगे कि नागेंद्र को मंत्रिमंडल में वापस क्यों लाया गया है।”
उन्होंने कहा कि विपक्ष बिना किसी आधार के, अनुसूचित जनजाति (एसटी) के मंत्री को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग कर रहा है।
उन्होंने कहा, “क्या केंद्र और अन्य राज्यों में ऐसे कई मंत्री नहीं हैं, जिनके खिलाफ मामले दर्ज हैं? हमने नागेंद्र के खिलाफ मामलों की जांच की है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामले में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका का कोई उल्लेख नहीं है। हमने भी इसकी जांच की है। कथित तौर पर गबन की गई करीब 84 करोड़ रुपये की राशि में से लगभग 79 करोड़ रुपये पहले ही बरामद किए जा चुके हैं। नागेंद्र से कुछ भी बरामद नहीं हुआ है और इस मामले में उनकी कोई संलिप्तता नहीं थी।”
नागेंद्र ने कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से धन के कथित गबन के आरोपों के बाद सिद्धरमैया के नेतृत्व वाली पिछली सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्हें तीन अगस्त को डी. के. शिवकुमार के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में फिर से शामिल किया गया। वह फिलहाल योजना और सांख्यिकी मंत्री हैं।
ईडी ने इस मामले में जुलाई 2024 में नागेंद्र को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसी साल अक्टूबर में बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी।
बेंगलुरु के दक्षिण जिले में बिदादी के पास ‘ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप’ (जीबीआईटी) परियोजना के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहित किए जाने के खिलाफ जद(एस) के विरोध को लेकर शिवकुमार ने केंद्रीय मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी पर भी निशाना साधा। उन्होंने पूछा कि जब उन्होंने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए कुमारस्वामी को आमंत्रित किया था, तो वह क्यों नहीं आए।
उन्होंने कहा, “उन्हें अपनी पार्टी से इस मुद्दे पर विधानसभा में चर्चा करने के लिए कहना चाहिए।”
शिवकुमार ने आरोप लगाया कि कुमारस्वामी अब इस मुद्दे पर ‘नाटक’ करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने ही शुरू में इस परियोजना के लिए जमीन का अधिग्रहण किया था और कुछ क्षेत्रों को ‘रेड जोन’ घोषित किया था।
भाषा प्रचेता मनीषा
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