IBC24 Swarna Sharda Scholarship 2026 : 8 साल की उम्र में मां को खोया, किसान पिता ने संभाली जिम्मेदारी! बेटी ने 93.80% लाकर बालोद में किया टॉप, अब IBC24 स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप से मिलेगा हौसला

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बालोद के कुसुमकसा गांव की खुशी विश्वकर्मा ने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 93.80 प्रतिशत अंक हासिल कर छात्राओं में जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया। महज 8 साल की उम्र में मां को खोने के बाद किसान पिता ने दोनों बेटियों की जिम्मेदारी संभाली। अब खुशी अपनी आगे की पढ़ाई के लिए IBC24 स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप की 50 हजार रुपये की राशि का उपयोग करेंगी और सिविल सर्विस में जाने का सपना देख रही हैं।

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  • Publish Date - August 19, 2026 / 04:37 PM IST,
    Updated On - August 19, 2026 / 04:37 PM IST
HIGHLIGHTS
  • 93.80% अंक हासिल कर खुशी ने बालोद जिले में छात्राओं में किया टॉप
  • 8 साल की उम्र में मां को खोया, किसान पिता ने दोनों बेटियों की जिम्मेदारी संभाली
  • आगे की पढ़ाई के लिए मिलेगी ₹50 हजार की IBC24 स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप

बालोद :यदि एक आदमी शिक्षित होता है तो केवल एक व्यक्ति शिक्षित होता है, लेकिन जब एक बेटी शिक्षित होती है तो पूरी पीढ़ी शिक्षित होती है। कुछ इन्हीं भावों और विचारों के साथ मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ का नंबर वन न्यूज चैनल IBC24 हर वर्ष बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ठ अंक अर्जित करने वाली बेटियों को हर साल स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप प्रदान करता है। स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप (Swarn Sharada Scholarship) केवल एक स्कॉलरशिप ही नहीं हैं, बल्कि यह उन बेटियों के भविष्य के लिए अंशदान है, जो समाज और अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा बने हैं। इस बार भी छत्तीसगढ़ में 12वीं की बोर्ड परीक्षा में स्टेट टॉपर बेटी को 1 लाख रुपए, उनके स्कूल को 1 लाख रुपए और जिले में प्रथम आने वाली बेटियों को 50-50 हजार रुपए प्रदान किए गए।  बालोद जिले के ग्राम कुसुमकसा स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी/हिंदी माध्यम विद्यालय की कुमारी खुशी विश्वकर्मा ने इस वर्ष कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 93.80 प्रतिशत अंक हासिल कर छात्राओं में बालोद जिले में प्रथम स्थान अर्जित किया है।खुशी विश्वकर्मा ग्राम कुसुमकसा निवासी हैं और किसान चंद्रशेखर विश्वकर्मा की बेटी हैं। वह शुरू से ही प्रतिभावान छात्राओं में अपना स्थान बनाए रखी हैं।

आठ साल की थीं तब उठा था माँ का साया

खुशी के परिवार में उसके पिता और दो बेटियां हैं। खुशी जब आठ साल की थीं, तभी उनके सिर से मां का साया उठ गया। उसके बाद पिता चंद्रशेखर विश्वकर्मा ने खेत की देखरेख के साथ-साथ मां और पिता दोनों की बेहतर ढंग से भूमिका निभाते हुए अपनी दोनों बेटियों का लालन-पालन किया और उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित किया।खुशी छोटी बेटी हैं। सामान्य परिवार और कम संसाधनों में रहते हुए खुशी अपनी पढ़ाई से विमुख नहीं हुईं और हर साल बेहतर अंक हासिल कर परीक्षा में सफल हुईं।

पढ़ाई के साथ पेंटिंग में भी रुचि रखती हैं ख़ुशी

खुशी पढ़ाई के साथ-साथ पेंटिंग में भी रुचि रखती हैं। पढ़ाई और घर में काम के अलावा पेंटिंग के लिए कुछ समय निकाल लेती हैं। स्कूल से आने के बाद ज्यादातर वह घर में ही रहती हैं।खुशी अब 12वीं की पढ़ाई के बाद बालोद के कॉलेज में बीएससी की पढ़ाई के लिए प्रवेश ले चुकी हैं। वह सिविल सर्विस में जाना चाहती हैं और इसके लिए वह अभी से तैयारी में जुट गई हैं।

आगे की पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप का करेगी उपयोग

खुशी इस बार प्रदेश के प्रतिष्ठित न्यूज चैनल IBC24 द्वारा स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप के तहत छात्राओं को दिए जाने वाले 50 हजार रुपये की स्कॉलरशिप और प्रशस्ति पत्र की हकदार बनी हैं। खुशी ने इस पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वह इस राशि का उपयोग अपने आगे की पढ़ाई के लिए करेंगी। उन्होंने कहा कि यह राशि आगे की पढ़ाई के लिए काफी हेल्पफुल साबित होगी। वहीं, खुशी के पिता ने कहा कि वे खेती कार्य करते हैं और इस सरकार से उन्हें खेती कार्य करने के लिए बेहतर सुविधाएं हासिल हो रही हैं।

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खुशी विश्वकर्मा ने 12वीं में कितने अंक हासिल किए?

खुशी ने 93.80 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं।

खुशी को स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप के तहत क्या मिलेगा?

उन्हें ₹50 हजार की स्कॉलरशिप और प्रशस्ति पत्र मिलेगा।

खुशी का भविष्य का सपना क्या है?

खुशी बीएससी की पढ़ाई के बाद सिविल सर्विस में जाना चाहती हैं।